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मास्टरमाइंड ऑडिट इंस्पेक्टर ने मास्टर प्लान बनाकर किया करोड़ो रुपए का गबन

मास्टरमाइंड ऑडिट इंस्पेक्टर ने मास्टर प्लान बनाकर किया करोड़ो रुपए का गबन

एक नही कई गांव की कॉपरेटिव सोसाइटीयों में गांव वालो के रुपए हड़पे

ऑडिट ब्रांच के दोनो इंस्पेक्टरों ने कैसे की करोड़ो रुपए की हेरा फेरी, कैसे मृतक व्यक्तियों के नाम पर लाखों रुपए किलो के रुपए की एक गबन

जालंधर (vikas) जालंधर के सहकारी बैंक के बाहर आप जो यह भीड़ देख रहे हैं यह भीड़ गांव उच्चा के लोगों की है जो आज सहकारी बैंक की ऐ आर ब्रांच कि अधिकारी जसविंदर कौर से मिलने पहुंचे हैं। इन लोगों का कहना है कि जब से उनके गांव में करोड़ों रुपए का गबन हुआ है तब से वह यहां कई बार आकर अपनी समस्याएं इन अधिकारियों को बता रहे हैं। वही गांव वालों का कहना है कि अधिकारी कानूनी कार्रवाई और रुपए वापस करने की बात तो करते हैं लेकिन उन्हें अभी तक अपने रुपए नहीं मिल पा रहे। गांव वालों ने बताया उच्चा गांव की कोऑपरेटिव सोसाइटी में 21 से 22 करोड रुपए जमा हुए थे जो सहकारी बैंक की ब्रांच के अधिकारी और मुलाजिम गबन कर चुके है। गांव वालों ने कहा ऐ आर से उनकी बात हुई है और उनको बोला गया है कि उनकी रिकवरी कर उनके दफन किए रुपए उनको लौटाई जाए और जो आरोपियों ने रुपए कप्पन किए हैं उन पर विभागीय कार्रवाई करते हुए बर्खास्त किया जाए। गांव के सेक्रेटरी सतपाल और बाकी मुलाजिमों ने उनके 21 से 22 करोड रुपए दफन किए हैं और अकेले सतपाल पर रुपए गबन करने की बात कही जा रही है लेकिन यह एक व्यक्ति का काम नही बल्कि जिनपर कानूनी कार्यवाही हुई है वह भी इसमें जिसने इनवॉल हैं। गांव वालों ने बताया कि उनके गांव के मृतक व्यक्तियों के नाम पर लोन भी हुए हैं जिनके रुपए इन आरोपियों ने गबन किए हैं सरकारी कागजों पर नकली आईडी भी इन आरोपियों ने बनाई थी।

 

जोड़ी नंबर वन यह फिल्म आपने देखी होगी,लेकिन हम किसी फिल्म की बात नहीं कर रहे।हम एक ऐसी जोड़ी की बात कर रहे हैं,जिन्होंने भोले भाले गांव के लोगों के करोड़ों रुपए हड़प लिए हैं।इस जोड़ी ने मास्टर प्लान बनाकर ग्रुप ग्रुप बनाकर करोड़ों रुपए गबन किए। आपको बता दे कि पिछले कई सालों से इस जोड़ी ने जालंधर के गांव ऊंचा में सहकारी बैंक व गांव की कोऑपरेटिव सोसायटी को लगातार लाखो करोड़ों रुपए का चूना लगाते आ रहे थे और जब साल के आखिर में कोऑपरेटिव सोसाइटी को प्रॉफिट शो करना होता था तो यह लगभग 1 करोड या उससे ज्यादा का प्रॉफिट शो कर देते थे। सहकारी बैंक की ऑडिट ब्रांच के दोनों ऑडिट इंस्पेक्टरों की जोड़ी ने गांव उच्चा में ही नहीं बल्कि और भी कई कोऑपरेटिव सोसायटीयों में लाखों करोड़ों रुपए का गबन किया है।अब आपको बताते हैं कि यह कैसे गांव के लोगों को लाखों करोड़ों रुपए का चूना लगाकर खुद एस प्रति किस जिंदगी व्यतीत कर रहे हैं।

इस महान जोड़ी के दोनों ऑडिटर एडिटर इंस्पेक्टरों के नाम नागेश और सुरेश है। इन दोनों ने ऊचा गांव की कोऑपरेटिव सोसायटी के सेल्समैन राजकुमार और सेक्रेटरी सतपाल को साथ मिलाकर करोड़ों रुपए कि घोटाले को अंजाम दिया। सूत्र बताते हैं कि यह लोग कई सालों से गांव उच्चा की कोऑपरेटिव सोसायटी में एडिट करके वहां की रिपोर्ट तैयार करते थे उस साल के अंत में लाखों करोड़ों रुपए का प्रॉफिट गांव की कोऑपरेटिव सोसाइटी को दिखा देते थे।कहते हैं कि पाप का घड़ा ज्यादा देर नहीं चलता आखिरकार इन चारों द्वारा किए गए घपले का मामला गांव की ही कोऑपरेटिव सोसाइटी में आईने की तरह सभी को दिखा दिया। गांव की कोऑपरेटिव सोसायटी के प्रधान और सदस्यों ने इस बड़े घपले की शिकायत पुलिस को दी थी लेकिन पुलिस ने गांव वालों की शिकायत को दरकिनार किया तो वही ऐ आर डिपार्टमेंट द्वारा डिप्टी कमिश्नर को भेजी गई शिकायत पर मामला दर्ज किया। इतने बड़े घोटाले को अंजाम देने वाले आरोपियों ने सोचा ना था कि कानून का शिकंजा किसी को बख्शता नहीं। पहले गांव के सेक्रेटरी सतपाल को पुलिस ने मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया तो उसने धीरे-धीरे इस करोड़ों रुपए के घोटालों में बाकियों के नाम बताने की शुरू कर दी है। पुलिस ने कोऑपरेटिव सोसायटी के सेल्समैन राजकुमार और ऑडिट इंस्पेक्टर सुरेश कुमार के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तारी डाली तो इस घोटाले का मास्टर प्लान बनाने वाला मास्टरमाइंड ऑडिट ब्रांच के एडिटर इंस्पेक्टर नागेश कुमार को डर सताने लगा कि अब पुलिस उसे भी उठाना ले। लेकिन इस मास्टरमाइंड की पहुंच कानून के आला अधिकारियों सहित न्याय करने वालों के साथ थी। इसमें तुरंत ही अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर इस घोटाले में नाम आने पर अपनी जमानत पहले से करवा कर कानून के शिकंजे से बचता रहा। जिस कारण अभी तक इस मास्टरमाइंड कि पुलिस द्वारा गिरफ्तारी नहीं हो पाई है और यह अभी भी जालंधर में रहकर अपनी ड्यूटी कर रहा है और ना जाने अभी और कितने कोऑपरेटिव सोसायटीओं को अपना निशाना बना कर उसमें से भी लाखों करोड़ों रुपए का गबन करेगा। हालांकि सुना था कि कानून के शिकंजे से आज तक कोई बच नहीं पाया लेकिन हैरानी इस बात की है के इस मास्टरमाइंड के खिलाफ मामला दर्ज होने पर भी कानून का शिकंजा इसे अपनी गिरफ्त में क्यों नहीं ले पाया यह अप सवालिया निशान खड़ा हो रहा है।

विश्वनीय सूत्र बताते हैं कि इन चारों ने इस करोड़ों रुपए के घोटाले को अंजाम देकर कैसे अपना कारोबार फैला रखा है। सूत्रों का कहना है कि सुरेश कुमार ने जालंधर शहर के पॉश इलाके में करोड़ों रुपए जमीन खरीद कर एडजेस्ट किए हैं तो वही नागेश कुमार ने बड़ी-बड़ी इंडस्ट्रीज कंपनियों को फाइनेंस के तौर पर रुपए दिए हैं। वही बात की जाए राजकुमार सेल्समैन की की तनख्वाह जो 25 से 30 हजार थी उसने लाखों रुपए की आलीशान कोठी बना कर और भी कारोबारियों के साथ कामों में रुपए लगाए हैं। वही बात की जाए कोऑपरेटिव सोसायटी थे सेक्रेट्री की तो उसने ब्याज पर लाखों रुपए दे रखे हैं। इन सभी के बारे में विभाग को पूरी जानकारी है लेकिन विभाग ने इन पर खानापूर्ति के लिए अपनी तरफ से थोड़ी बहुत कार्रवाई की है लेकिन इन आरोपियों को उस कार्रवाई का कोई फर्क नहीं पड़ रहा और वह कानून को ठेंगा दिखाकर और सहकारी बैंक के विभाग को उंगलियों पर नचाते अपना काम कर रहे हैं।