Monday, 02 November 2026
Crime
जालंधर में कॉलेजों के बाहर ‘कैबिन कारोबार’ का सच क्या? BSF कॉलोनी में बंद केबिनों पर उठे गंभीर सवाल, प्रशासन की निगरानी पर भी सवालिया निशान
जालंधर में कॉलेजों के बाहर ‘कैबिन कारोबार’ का सच क्या? BSF कॉलोनी में बंद केबिनों पर उठे गंभीर सवाल, प्रशासन की निगरानी पर भी सवालिया निशान
₹500 प्रति घंटे बैठने और ₹1,000 तक कमरे के किराये की चर्चा! दुकानों के अंदर बने बंद कैबिनों में आखिर क्या चल रहा है? ACP ने जांच का दिया भरोसा, अब नगर निगम और पुलिस की कार्रवाई का इंतजार।
जालंधर | Mera Bharat News की विशेष पड़ताल
जालंधर के थाना नंबर-2 के अंतर्गत आते BSF कॉलोनी क्षेत्र में कॉलेजों के सामने स्थित कुछ दुकानों के अंदर बनाए गए बंद कैबिन अब चर्चा का विषय बनते जा रहे हैं। बाहर से सामान्य दुकानें दिखाई देने वाले इन परिसरों के अंदर कथित तौर पर ऐसी व्यवस्था बनाई गई है, जहां लड़के-लड़कियों को घंटे के हिसाब से बैठने के लिए निजी कैबिन उपलब्ध करवाए जाने के दावे किए जा रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर सामने आ रही जानकारी के मुताबिक, कुछ स्थानों पर एक घंटे के लिए करीब ₹500 और कमरों के इस्तेमाल के लिए ₹1,000 तक किराया वसूले जाने की चर्चा है। इतना ही नहीं, आने-जाने वाले लोगों का समय रजिस्टर में दर्ज किए जाने की बात भी सामने आ रही है।
हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि और मौके पर जांच अभी बाकी है। लेकिन सवाल यह है कि यदि दुकानों के अंदर इस तरह की व्यावसायिक व्यवस्था चल रही है तो इसकी जानकारी संबंधित विभागों को क्यों नहीं है?
दुकानों के अंदर बंद कैबिन: कारोबार या नियमों की अनदेखी?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन दुकानों में बने बंद कैबिन स्वीकृत बिल्डिंग प्लान के अनुसार हैं? क्या दुकानदारों ने परिसर के मूल स्वरूप में बदलाव करने की अनुमति ली है? क्या इन परिसरों में व्यावसायिक गतिविधियां चलाने के लिए जरूरी लाइसेंस और अनुमतियां उपलब्ध हैं?
यदि किसी दुकान को बिना आवश्यक अनुमति के कमरों या बंद कैबिनों में तब्दील किया गया है तो नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच की जिम्मेदारी बनती है कि वह इसकी जांच करे।
कॉलेजों के आसपास ऐसी व्यवस्था पर पुलिस की निगरानी कहां?
कॉलेजों के सामने स्थित इन दुकानों को लेकर स्थानीय लोगों द्वारा विद्यार्थियों के आने-जाने के दावे किए जा रहे हैं। ऐसे में पुलिस की जिम्मेदारी केवल किसी शिकायत के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों की समय-समय पर जांच करना भी है।
यह भी जांच का विषय है कि क्या इन परिसरों में आने-जाने वाले लोगों की पहचान, सुरक्षा, अग्निशमन व्यवस्था और अन्य आवश्यक मानकों का पालन किया जा रहा है।
किन विभागों को देनी होगी जवाबदेही?
इस मामले में निम्नलिखित विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है:
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थाना नंबर-2 एवं ACP सेंट्रल: दुकानों में संचालित गतिविधियों की जांच और किसी कानून के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई।
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नगर निगम जालंधर की बिल्डिंग ब्रांच: स्वीकृत नक्शे, निर्माण और दुकानों के अंदर किए गए बदलावों की जांच।
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नगर निगम की लाइसेंसिंग शाखा: संबंधित व्यावसायिक गतिविधियों के लिए आवश्यक लाइसेंस की जांच।
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फायर विभाग: परिसर की प्रकृति और लागू नियमों के अनुसार अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की जांच।
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जिला प्रशासन: विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बनाकर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना।
ACP राजेश ठाकुर ने दिया जांच का भरोसा
इस संबंध में ACP सेंट्रल राजेश ठाकुर ने कहा है कि वह अपने क्षेत्र में समय-समय पर चेकिंग करते रहते हैं। उन्होंने कॉलेजों के आसपास स्थित संदिग्ध कैबिनों और दुकानों की जल्द जांच करवाने की बात कही है। उनका कहना है कि यदि कोई गैरकानूनी गतिविधि सामने आती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
Mera Bharat News के प्रशासन से सीधे सवाल
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क्या इन दुकानों के अंदर बने बंद कैबिन स्वीकृत बिल्डिंग प्लान का हिस्सा हैं?
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क्या दुकानदारों ने इस प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियों के लिए जरूरी अनुमति ली है?
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क्या पुलिस ने कभी इन दुकानों की औचक जांच की है?
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क्या कथित तौर पर ₹500 प्रति घंटे और ₹1,000 तक किराया वसूले जाने के दावों की जांच होगी?
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क्या इन परिसरों में अग्नि सुरक्षा और अन्य जरूरी मानकों का पालन हो रहा है?
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क्या नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच मौके पर निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक करेगी?
अब देखना यह है कि ACP सेंट्रल द्वारा दिए गए जांच के भरोसे के बाद वास्तव में कार्रवाई होती है या मामला केवल आश्वासन तक सीमित रह जाता है। Mera Bharat News इस मामले में संबंधित विभागों की कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों पर नजर रखेगा।
*नोट: इस रिपोर्ट में वर्णित किराये, गतिविधियों और दुकानों की व्यवस्थ