मैरिटन होटल को कोर्ट से अंतरिम राहत, लेकिन नगर निगम की कार्रवाई पर उठे बड़े सवाल
जालंधर। मैरिटन होटल से जुड़े निर्माण और संपत्ति विवाद में अदालत के अंतरिम आदेश के बाद नगर निगम की तत्काल कार्रवाई पर फिलहाल रोक लग गई है। Gautam Kukreja बनाम Municipal Corporation, CNR No. PBJL020041402026, Civil Suit No. CS-2450-2026 मामले में अतिरिक्त सिविल जज (सीनियर डिवीजन), जालंधर की अदालत ने 18 अगस्त 2026 को आदेश जारी करते हुए कानून की उचित प्रक्रिया के बिना होटल की संपत्ति को सील करने, तोड़फोड़ करने या शांतिपूर्ण कब्जे में हस्तक्षेप करने से नगर निगम को रोक दिया है।
हालांकि, अदालत का आदेश होटल को किसी तरह की अंतिम क्लीन चिट नहीं देता। आदेश में स्पष्ट है कि नगर निगम कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकता है। मामले की अगली सुनवाई 28 अगस्त 2026 को होगी।
नगर निगम पहले जारी कर चुका है कई नोटिस
मैरिटन होटल को लेकर नगर निगम की ओर से पहले भी कई नोटिस जारी किए जाने की बात सामने आई है। होटल को खाली करवाने को लेकर नगर निगम द्वारा जालंधर पुलिस कमिश्नर से पुलिस सहायता मांगे जाने का मामला भी सामने आ चुका है। ऐसे में अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर नगर निगम की कार्रवाई किस स्तर पर और क्यों अटकी हुई है।
क्या राजनीतिक दबाव में रुकी कार्रवाई?
होटल को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल राजनीतिक हस्तक्षेप और दबाव को लेकर उठ रहा है। क्या किसी राजनीतिक दल या प्रभावशाली व्यक्ति के दबाव के कारण नगर निगम होटल के खिलाफ कार्रवाई को आगे नहीं बढ़ा पा रहा? यदि ऐसा कोई दबाव नहीं है, तो फिर नगर निगम की ओर से पहले जारी किए गए नोटिसों और कार्रवाई की प्रक्रिया का परिणाम अब तक सामने क्यों नहीं आया?
हालांकि, राजनीतिक दबाव संबंधी किसी आरोप की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए यह सवाल फिलहाल जांच और नगर निगम के जवाब का विषय है।
एक मामले में कार्रवाई, दूसरे में इंतजार क्यों?
शहर में यह चर्चा भी तेज है कि निर्माण एवं भवन नियमों से जुड़े मामलों में नगर निगम अलग-अलग मामलों में अलग-अलग रवैया क्यों अपना रहा है। इसी श्रेणी से जुड़े एक अन्य निजी होटल पर नगर निगम की कार्रवाई और तोड़फोड़ हो चुकी है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब एक मामले में निगम सख्त कार्रवाई कर सकता है तो मैरिटन होटल के मामले में कार्रवाई आगे बढ़ाने में इतनी देरी क्यों हो रही है?
28 अगस्त को सामने आएगा नगर निगम का पक्ष
अदालत ने फिलहाल होटल को अवैध घोषित नहीं किया है और न ही नगर निगम की सभी वैधानिक शक्तियों पर रोक लगाई है। अंतरिम आदेश का दायरा केवल कानून की उचित प्रक्रिया के बिना जबरन सीलिंग, तोड़फोड़ अथवा कब्जे में हस्तक्षेप से संबंधित है।
अब 28 अगस्त 2026 की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस दौरान नगर निगम होटल के स्वीकृत नक्शे, निर्माण, कंप्लीशन सर्टिफिकेट, विभिन्न विभागों की NOC तथा पहले जारी किए गए नोटिसों से जुड़े अपने तथ्य अदालत के सामने रख सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या नगर निगम मैरिटन होटल मामले में नियमों के तहत निर्णायक कार्रवाई करेगा, या मामला फिर नोटिसों और कानूनी प्रक्रिया के बीच उलझा रहेगा?