नेपाल-तिब्बत सीमा पर जलप्रलय से भारी तबाही, मृतकों की संख्या 469 पहुंची, 1,468 लोग अब भी लापता
काठमांडू। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने और उसके बाद आए भीषण एवलांच से उत्पन्न जलप्रलय ने व्यापक तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 469 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि सीमा के दोनों ओर कुल 1,468 लोगों के लापता होने की सूचना है। राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है, लेकिन टूटी सड़कों, ध्वस्त पुलों और भारी मलबे के कारण प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना चुनौती बना हुआ है।
आपदा के बाद भूटे कोशी नदी में आए तेज बहाव ने कई शहरों और गांवों को अपनी चपेट में ले लिया। घर, वाहन, सड़कें और पुल बह गए, जबकि रसुवा और नुवाकोट जिलों की कई बस्तियां कीचड़ और मलबे के नीचे दब गईं। नदी तंत्र से जुड़े क्षेत्रों में स्थित कई पनबिजली परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
भारत भी इस आपदा पर नजर बनाए हुए है और उन 290 भारतीय नागरिकों का पता लगाने का प्रयास कर रहा है, जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। बचाव दल हेलीकॉप्टरों और जमीनी टीमों की मदद से प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
दूसरी बाढ़ का खतरा बरकरार
हालात को और गंभीर बनाते हुए भूटे कोशी नदी के ऊपरी क्षेत्र में एक नई झील बनने की जानकारी सामने आई है। विशेषज्ञों को आशंका है कि यदि यह झील टूटती है तो एक और भीषण बाढ़ आ सकती है, जिससे पहले से प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त नुकसान होने का खतरा पैदा हो गया है।
बचाव दल नदी किनारे और अलग-थलग पड़े गांवों में जीवित लोगों की तलाश के साथ-साथ बहकर आए शवों को निकालने का कार्य भी कर रहे हैं। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी है।
1,592 लोगों को सुरक्षित निकाला गया
नेपाल पुलिस के अनुसार, अब तक 796 लोगों को हेलीकॉप्टरों के माध्यम से सुरक्षित निकाला गया है, जिनमें 50 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 796 अन्य लोगों को सड़क मार्ग से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया है।
अधिकारियों के मुताबिक नेपाल में 910 लोगों के लापता होने की सूचना है, जबकि तिब्बत क्षेत्र में 558 अन्य लोगों का अभी तक कोई पता नहीं चल सका है। इस प्रकार दोनों क्षेत्रों में लापता लोगों की कुल संख्या 1,468 हो गई है।
पुलिस के अनुसार सबसे अधिक 137 शव चितवन जिले से बरामद किए गए हैं। इसके अलावा रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी जिलों से भी बड़ी संख्या में शव मिलने की पुष्टि हुई है।
सुरक्षा बलों के जवान भी लापता
इस आपदा में आम नागरिकों के साथ-साथ सुरक्षा बलों को भी भारी नुकसान हुआ है। लापता लोगों में नेपाल सेना के 44 जवान, नेपाल पुलिस के 28 कर्मी और आर्म्ड पुलिस फोर्स के 13 जवान शामिल हैं। इसके अलावा विभिन्न हाइड्रोपावर परियोजनाओं और कस्टम कार्यालयों में कार्यरत लगभग 160 कर्मचारियों के भी लापता होने की सूचना है।
प्राकृतिक आपदा की इस भयावह त्रासदी ने नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती क्षेत्रों में जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। राहत एजेंसियां लगातार बचाव कार्यों में जुटी हैं, जबकि प्रशासन संभावित दूसरी बाढ़ के खतरे को देखते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कोशिश कर रहा है।