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भाजपा ने भारत को ‘विश्वगुरु’ बनाने का वादा किया था, लेकिन आज ताइवान जैसा छोटा देश भी भारत को पीछे छोड़ चुका है: हरपाल सिंह चीमा

28 May 2026 | 6 Views

भाजपा ने भारत को ‘विश्वगुरु’ बनाने का वादा किया था, लेकिन आज ताइवान जैसा छोटा देश भी भारत को पीछे छोड़ चुका है: हरपाल सिंह चीमा

भाजपा ने भारत को ‘विश्वगुरु’ बनाने का वादा किया था, लेकिन आज ताइवान जैसा छोटा देश भी भारत को पीछे छोड़ चुका है: हरपाल सिंह चीमा

 

भाजपा के 12 साल के राज में आर्थिकता बर्बाद हो चुकी है और आम आदमी बढ़ती कीमतों के नीचे कुचला जा रहा है, पीएम मोदी को अब बताना चाहिए कि वह देश की आर्थिकता को कैसे संभालेंगे: हरपाल सिंह चीमा

 

140 करोड़ भारतीय महंगाई और बेरोजगारी से परेशान हैं, जबकि भाजपा लगातार गिरती आर्थिकता का सच छिपा रही है: हरपाल सिंह चीमा

 

मोदी सरकार ने अपनी गिरती आर्थिकता और बजट की गड़बड़ी को छिपाने के लिए आरबीआई के सुरक्षा कवच को कमजोर किया: हरपाल सिंह चीमा

 

चंडीगढ़, 27 मई

 

पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बुधवार को कहा कि भाजपा की केंद्र सरकार के शासन में भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार कमजोर हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के 12 वर्षों के शासन ने देश को आर्थिक मंदी, बढ़ते कर्ज, महंगाई, बेरोजगारी और निवेशकों के घटते भरोसे की स्थिति में पहुंचा दिया है।

 

एक बयान जारी करते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भाजपा सरकार ने भारत को “विश्वगुरु” बनाने का वादा किया था, लेकिन आज देश प्रमुख आर्थिक संकेतकों के मामले में छोटी अर्थव्यवस्थाओं से भी पीछे रह गया है।

 

उन्होंने कहा, “ताइवान का मार्केट कैपिटलाइजेशन अब भारत से आगे निकल गया है। केवल 2.5 करोड़ की आबादी वाला देश 1.3 बिलियन की आबादी वाले भारत से आगे निकल गया है। भारत, जो कभी जीडीपी आकार के मामले में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था, अब छठे स्थान पर खिसक गया है।”

 

उन्होंने कहा कि भौगोलिक क्षेत्र और आबादी दोनों में भारत से बहुत छोटा देश आर्थिक रूप से आगे निकल गया, जबकि भाजपा सरकार आर्थिक मुद्दों पर जवाबदेही से बच रही है। उन्होंने कहा, “वे भारत को विश्वगुरु बनाना चाहते थे, लेकिन आज जापान से भी छोटा और सिर्फ 2.5 करोड़ की आबादी वाला देश हमसे आगे निकल गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब स्पष्ट करना चाहिए कि वे देश की अर्थव्यवस्था को कैसे संभालने की योजना बना रहे हैं।”

 

वित्त मंत्री ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के रिस्क बफर से जुड़े हालिया फैसले पर भी केंद्र सरकार से सवाल किए। उन्होंने कहा कि यह फैसला दर्शाता है कि भाजपा सरकार दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती की बजाय अल्पकालिक बजट प्रबंधन को प्राथमिकता दे रही है।

 

आरबीआई द्वारा केंद्र सरकार को रिकॉर्ड डिविडेंड ट्रांसफर करने से पहले अपने कंटिंजेंट रिस्क बफर को 7.5 प्रतिशत से घटाकर 6.5 प्रतिशत करने की रिपोर्ट का हवाला देते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि ऐसे फैसले देश की वित्तीय स्थिरता को कमजोर कर सकते हैं।

 

उन्होंने कहा, “जब आरबीआई ने केंद्र सरकार को रिकॉर्ड डिविडेंड दिया था, तब भी हमने यह मुद्दा उठाया था। देश की सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय संस्था की रिस्क मैनेजमेंट क्षमता की कीमत पर इस तरह के ट्रांसफर नहीं किए जा सकते। यह सरकार केवल अपने बजट को संतुलित करने में रुचि रखती है, चाहे इसके लिए तेल की कीमतें बढ़ानी पड़ें, महंगाई बढ़ानी पड़े या आरबीआई की वित्तीय ताकत को कमजोर करना पड़े।”

 

हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि केंद्र सरकार को यह जवाब देना चाहिए कि केवल बजट प्रबंधन के लिए आरबीआई की रिस्क मैनेजमेंट क्षमता से समझौता क्यों किया गया।

 

उन्होंने कहा, “भाजपा का आर्थिक प्रबंधन पूरी तरह विफल साबित हुआ है। आम नागरिक महंगाई, तेल की बढ़ती कीमतों और कमजोर होती आर्थिक स्थिरता के रूप में इसकी कीमत चुका रहा है, जबकि सरकार लगातार तथ्यों को छिपाकर लोगों को गुमराह कर रही है।”

 

पंजाब के वित्त मंत्री ने कहा कि देश को पारदर्शी आर्थिक प्रशासन, घरेलू मांग को मजबूत करने, रोजगार सृजन, महंगाई नियंत्रण और निवेशकों का भरोसा बहाल करने वाली नीतियों की जरूरत है, न कि ध्यान भटकाने वाली राजनीति और केवल सुर्खियां बटोरने वाले फैसलों की।

Published on: 28 May 2026

Global Admin
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