बेजुबानों की सेवा कर इंसानियत का फर्ज निभा रहीं शम्मा
जालंधर : शम्मा को बचपन से ही बेजुबानों से प्यार रहा है। उनके घर में हमेशा बेजुबानों का पालन-पोषण हुआ। परिवार से हमेशा उन्हें दूसरों की सेवा करने के संस्कार मिले। पति व बेटा बेटी भी उनका पूरा सहयोग करते हैं।पूरा परिवार मिलकर कई बार घायल कुत्तों का रेस्क्यू भी कर चुके हैं।शम्मा ने बताया कि सड़क पर घूम रहे जख्मी कुत्तों को अस्पताल तक ले जाना बहुत कठिन होता है। कोई डॉक्टर इन तक आना नहीं चाहता। इस समस्या से निपटने के लिए मेरी बेटी ने डॉक्टर से प्राथमिक चिकित्सा का हुनर सीखा। अब मैं और मेरी बेटी अपने साथ दवा, मरहम, पट्टी, खाने का सामान आदि रखती हूं। जहां भी घायल या बीमार कुत्ते मिलते है, उसकी मरहम-पट्टी कर दवा दे देती हूं।