जालंधर के करोल बाग में फिर खड़ी हो गईं अवैध दुकानें!
निगम की कार्रवाई बनी मजाक, अफसरों की मिलीभगत के बिना कैसे हुआ दोबारा निर्माण?
करोल बाग में DIPS स्कूल के सामने बनी अवैध दुकानों का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। हैरानी की बात यह है कि जिन दुकानों पर पहले नगर निगम ने कार्रवाई कर उन्हें तोड़ने का दावा किया था, वही दुकानें अब दोबारा बनकर लगभग तैयार खड़ी दिखाई दे रही हैं।
इलाके में चर्चा है कि बिना नगर निगम अधिकारियों की कथित मिलीभगत के यह दोबारा निर्माण संभव ही नहीं था। लोगों का कहना है कि अगर निगम ने सच में सख्ती दिखाई होती तो दोबारा ईंट तक नहीं लग पाती, लेकिन यहां तो कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आ रही है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि दिन-दहाड़े अवैध निर्माण चलता रहा, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने आंखें मूंदे रखीं। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या नगर निगम की कार्रवाई सिर्फ दिखावा थी? अगर निर्माण अवैध था तो फिर दोबारा कैसे खड़ा हो गया? और अगर वैध था तो पहले कार्रवाई क्यों की गई?
इस मामले को उठाने में ह्यूमन राइट्स चेयरमैन सम्राट ने पहले भी अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने कथित अवैध निर्माण को लेकर निगम प्रशासन को शिकायत दी थी, जिसके बाद कार्रवाई हुई थी। मगर अब दोबारा निर्माण होने से निगम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
इलाके के लोगों ने मांग की है कि पूरे मामले की विजिलेंस जांच करवाई जाए और यह पता लगाया जाए कि आखिर किसके संरक्षण में अवैध दुकानें दोबारा खड़ी की गईं। लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन अब भी नहीं जागा तो करोल बाग में अवैध निर्माण का सिलसिला रुकने वाला नहीं है।