जालंधर में धार्मिक बोर्ड हटाने पर विवाद, AAP के भीतर खींचतान के संकेत
जालंधर, प्रतिनिधि: शहर में धार्मिक बोर्डों को हटाने का मामला अब राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। जालंधर सेंट्रल से विधायक रमन अरोड़ा द्वारा भगवान बालाजी महोत्सव के लिए लगाए गए बोर्डों को नगर निगम टीम द्वारा हटाए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है।
विधायक के बोर्डों को हटाने पर उठे सवाल
जानकारी के अनुसार, सेंट्रल हलके में लगाए गए इन बोर्डों पर भगवान बालाजी की तस्वीर के साथ विधायक की फोटो भी लगी हुई थी। ये बोर्ड महोत्सव के निमंत्रण के रूप में लगाए गए थे।
हालांकि, नगर निगम की कार्रवाई के दौरान इन बोर्डों को कई जगहों से फाड़कर उतार दिया गया, जिससे स्थानीय लोगों में नाराज़गी देखी गई।
मेयर के आदेशों पर चर्चा तेज
इस कार्रवाई को लेकर शहर के मेयर विनीत धीर पर सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि बोर्ड हटाने के आदेश नगर निगम स्तर से दिए गए थे, जिससे यह मामला और भी संवेदनशील बन गया है।
लोगों ने जताया विरोध
स्थानीय लोगों ने धार्मिक बोर्डों को हटाए जाने का विरोध किया। उनका कहना है कि यह केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था से जुड़ा मामला भी है।
इसके बावजूद, कई स्थानों पर बोर्ड हटाने की कार्रवाई जारी रही।
पार्टी के भीतर मतभेद की अटकलें
एक ही पार्टी के विधायक और मेयर के बीच इस तरह की स्थिति ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को तेज कर दिया है। इसे आम आदमी पार्टी के अंदरूनी मतभेद के तौर पर भी देखा जा रहा है, हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
मामला चंडीगढ़ तक पहुंचने की चर्चा
सूत्रों के अनुसार, यह विवाद अब चंडीगढ़ तक पहुंच चुका है, जहां पार्टी नेतृत्व इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में इस मामले पर स्पष्टता आने की उम्मीद है।
प्रशासनिक कार्रवाई या सियासी टकराव?
अब बड़ा सवाल यही है कि यह कार्रवाई नगर निगम की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा थी या इसके पीछे कोई सियासी कारण हैं।
फिलहाल, इस मुद्दे ने जालंधर की राजनीति में हलचल जरूर पैदा कर दी है।