चंडीगढ़/लुधियाना। पंजाब में सरकारी कर्मचारियों और राज्य सरकार के बीच जारी विवाद एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है। कर्मचारियों के खिलाफ की गई सरकारी कार्रवाई के विरोध में विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन को और तेज करने का फैसला लिया है। इसके लिए आगामी दिनों का विस्तृत कार्यक्रम भी घोषित कर दिया गया है।
लुधियाना में आयोजित कर्मचारी संगठनों की बैठक में आंदोलन की अगली रणनीति तैयार की गई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि कर्मचारियों की मांगों को लेकर चरणबद्ध तरीके से संघर्ष को आगे बढ़ाया जाएगा। संगठनों का कहना है कि सरकार द्वारा कर्मचारियों के खिलाफ जारी किए गए पत्रों और कार्रवाई को तत्काल वापस लिया जाए।
कर्मचारी नेताओं ने घोषणा की कि 8 सितंबर को राज्यभर के कर्मचारी सामूहिक छुट्टी लेकर सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराएंगे। इसके बाद आंदोलन को और तेज करते हुए 12 और 13 सितंबर को विभिन्न मंत्रियों का घेराव किया जाएगा।
संगठनों के अनुसार, यदि सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाया तो 19 और 20 सितंबर को पंजाब के विभिन्न क्षेत्रों में विधायकों के आवासों का घेराव किया जाएगा। इसके अलावा 21 और 22 सितंबर को दोबारा सामूहिक छुट्टी रखकर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
आंदोलन के अंतिम चरण में 30 सितंबर को चंडीगढ़ में एक बड़ी कर्मचारी विधानसभा आयोजित करने की तैयारी की जा रही है, जिसमें राज्यभर से कर्मचारी प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि उनका संघर्ष कर्मचारियों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए है तथा जब तक उनकी मांगों पर उचित निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर, इन घोषणाओं के बाद आने वाले दिनों में पंजाब में सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच टकराव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
अब सभी की निगाहें सरकार की आगामी प्रतिक्रिया और कर्मचारी संगठनों के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।