पंजाब विधानसभा ने 9 महत्वपूर्ण विधेयक किए पारित, शिक्षा से लेकर पर्यावरण संरक्षण तक कई क्षेत्रों को मिलेगा बल
चंडीगढ़, 10 अगस्त।
पंजाब विधानसभा ने शिक्षा, बुनियादी ढांचा, कर व्यवस्था, रोजगार, ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े 9 महत्वपूर्ण विधेयक पारित कर दिए हैं। इन विधेयकों के पारित होने से राज्य के विधायी और नियामक ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा द्वारा सदन में पेश किया गया पंजाब कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर (रेगुलेशन एंड मेंटेनेंस) संशोधन विधेयक, 2026 बहुमत से पारित हुआ। यह विधेयक बुनियादी ढांचे के बेहतर प्रबंधन और रखरखाव से संबंधित प्रावधानों को मजबूत करेगा।
शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस द्वारा प्रस्तुत ‘द पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) विधेयक, 2026’ को सदन ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी। इस विधेयक का उद्देश्य निजी गैर-सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों की फीस संबंधी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।
सदन ने विश्वविद्यालयों से संबंधित तीन महत्वपूर्ण विधेयक भी पारित किए। इनमें क्लाउड यूनिवर्सिटी, होशियारपुर विधेयक, 2026, एम.एस. डिजिटल यूनिवर्सिटी, पटियाला विधेयक, 2026 और फिजिक्सवाला डिजिटल यूनिवर्सिटी, पटियाला विधेयक, 2026 शामिल हैं। इन सभी विधेयकों को शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने पेश किया था और इन्हें बहुमत से मंजूरी प्रदान की गई।
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा द्वारा पेश किया गया पंजाब गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (संशोधन) विधेयक, 2026 भी बहुमत से पारित हो गया। इसके अलावा पंजाब राज्य आउटसोर्स्ड परसोनल (ट्रांजिशन टू कॉन्ट्रैक्चुअल एंगेजमेंट) विधेयक, 2026 को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई।
पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद द्वारा प्रस्तुत पंजाब पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी सदन ने बहुमत से पारित किया। वहीं वन एवं वन्य जीव संरक्षण मंत्री लाल चंद कटारूचक्क द्वारा पेश पंजाब प्रोटेक्शन ऑफ ट्रीज़ विधेयक, 2026 को भी बहुमत का समर्थन प्राप्त हुआ।
इन सभी विधेयकों के पारित होने को राज्य सरकार की प्रशासनिक सुधार, गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ शिक्षा, बेहतर संस्थागत प्रबंधन, कर्मचारियों और नागरिकों के हितों की सुरक्षा, ग्रामीण विकास तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि इन विधायी कदमों से विभिन्न क्षेत्रों में नीतिगत सुधारों को गति मिलेगी और राज्य के समग्र विकास को मजबूती प्राप्त होगी।