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पंजाब विधानसभा ने निजी स्कूल फीस नियमन विधेयक किया पारित, 5 प्रतिशत से अधिक फीस वृद्धि पर लगेगी रोक

11 Aug 2026 | 45 Views

पंजाब विधानसभा ने निजी स्कूल फीस नियमन विधेयक किया पारित, 5 प्रतिशत से अधिक फीस वृद्धि पर लगेगी रोक

पंजाब विधानसभा ने निजी स्कूल फीस नियमन विधेयक किया पारित, 5 प्रतिशत से अधिक फीस वृद्धि पर लगेगी रोक

चंडीगढ़, 10 अगस्त।

पंजाब विधानसभा ने निजी स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने पर रोक लगाने के उद्देश्य से ‘पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) बिल, 2026’ को सर्वसम्मति से पारित कर दिया। इस विधेयक के लागू होने के बाद राज्य के निजी स्कूल नए शैक्षणिक सत्र में 5 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेंगे और अभिभावकों से किसी भी मद के तहत वसूली जाने वाली राशि को फीस ही माना जाएगा।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार शिक्षा को व्यापार नहीं बनने देगी और शिक्षा माफिया को किसी भी कीमत पर बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब निजी स्कूल अभिभावकों से किसी भी नाम पर पैसा वसूलें, उसे फीस के दायरे में माना जाएगा और उस पर कानून के प्रावधान लागू होंगे।

नए कानून के तहत निजी स्कूलों की फीस संरचना की जांच के लिए फोरेंसिक ऑडिट करवाया जाएगा। यदि किसी स्कूल द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक फीस वसूले जाने का मामला सामने आता है तो अतिरिक्त राशि अभिभावकों को वापस करनी होगी। सरकार का दावा है कि इससे फीस वसूली में पारदर्शिता आएगी और अभिभावकों को राहत मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि जिन निजी स्कूलों ने पिछले तीन वर्षों के दौरान कुल मिलाकर 15 प्रतिशत से अधिक फीस वृद्धि की है, उनसे अतिरिक्त वसूली गई राशि वापस करवाई जाएगी। वहीं भविष्य में 5 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाने के लिए संबंधित रेगुलेटरी प्राधिकरण की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी।

विधेयक में उल्लंघन करने वाले स्कूलों के लिए कड़े दंड का प्रावधान भी किया गया है। पहली बार नियम तोड़ने पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया जाएगा, दूसरी बार ₹1 लाख का जुर्माना होगा और तीसरी बार उल्लंघन करने पर स्कूल की मान्यता रद्द की जा सकती है। इसके अलावा विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए अन्य आवश्यक कार्रवाई भी की जाएगी।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान जब स्कूल बंद थे और स्कूल बसें नहीं चल रही थीं, तब भी अभिभावकों से ट्रांसपोर्ट फीस वसूली गई थी। उन्होंने कहा कि अब ऐसी स्थिति दोबारा नहीं होने दी जाएगी और विद्यार्थियों व अभिभावकों के हित सर्वोपरि रहेंगे।

उन्होंने कहा कि राज्य के लगभग 7,800 निजी स्कूलों में 32 लाख से अधिक विद्यार्थी पढ़ रहे हैं और यह कानून उनके हितों की सुरक्षा के लिए लाया गया है। सरकार का मानना है कि इससे निजी शिक्षण संस्थानों में जवाबदेही बढ़ेगी, फीस वृद्धि पर नियंत्रण रहेगा और अभिभावकों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों से वसूले जाने वाले सभी शुल्क, जिनमें ट्रांसपोर्ट फीस, बिल्डिंग फंड और अन्य विभिन्न शुल्क शामिल हैं, नियमन के उद्देश्य से फीस का हिस्सा माने जाएंगे। साथ ही डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता वाली जिला रेगुलेटरी समिति फीस वृद्धि से जुड़े प्रस्तावों की समीक्षा और निगरानी करेगी।

उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक प्रत्येक विद्यार्थी की पहुंच सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है और यह विधेयक शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता तथा जवाबदेही स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

Published on: 11 Aug 2026

Global Admin
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