प्रो. डॉ. विद्वान सिंह सोनी का निधन, विज्ञान और जीवाश्म शोध जगत को अपूरणीय क्षति
पटियाला। प्रख्यात शिक्षाविद्, प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी और लोकप्रिय विज्ञान लेखक प्रो. डॉ. विद्वान सिंह सोनी का शुक्रवार को पटियाला में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते निधन हो गया। वह 83 वर्ष के थे। उनके निधन से शिक्षा, विज्ञान और शोध जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
डॉ. सोनी गवर्नमेंट महिंद्रा कॉलेज, पटियाला तथा गवर्नमेंट कॉलेज, रोपड़ के प्रिंसिपल रह चुके थे। तीन दशक से अधिक लंबे शैक्षणिक जीवन में उन्होंने हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा और मार्गदर्शन प्रदान किया। उनके परिवार में दो बेटियां और एक बेटा हैं।
शिवालिक क्षेत्र से खोजे दुर्लभ जीवाश्म
भौतिकी के प्रोफेसर होने के बावजूद डॉ. सोनी की विशेष रुचि जीवाश्मों और प्रागैतिहासिक पत्थर के औजारों के अध्ययन में थी। उन्होंने अपने इस जुनून को वर्षों के शोध में बदलते हुए उप-हिमालयी और शिवालिक क्षेत्र में व्यापक खोज अभियान चलाया।
उनके संग्रह में लगभग 5 लाख वर्ष पुराने 12 फीट लंबे हाथी के दांत तथा करीब 55 लाख वर्ष पुराने 7 फीट लंबे दांतों का दुर्लभ जोड़ा शामिल था। इसके अलावा उन्होंने दरियाई घोड़े, जंगली सुअर, घोड़े, मछली, मगरमच्छ और विशालकाय कछुओं के कई दुर्लभ जीवाश्म भी खोजे। इन खोजों की प्रदर्शनी पंजाबी यूनिवर्सिटी में लगाई गई थी, जिसने शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
पिता-पुत्र ने स्थापित किया फॉसिल म्यूजियम
डॉ. सोनी ने अपने पुत्र डॉ. अनुजोत सिंह सोनी के साथ मिलकर उत्तर-पश्चिमी उप-हिमालयी क्षेत्र में प्रागैतिहासिक पाषाण औजारों पर महत्वपूर्ण शोध किया। उन्होंने ‘सोआनियन’ काल के औजारों, गढ़े हुए पत्थरों और धारदार हथियारों की विभिन्न श्रेणियों की पहचान कर उन्हें वैज्ञानिक रूप से दस्तावेजीकृत किया।
प्रागैतिहासिक जीवन और मानव विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पंजाबी यूनिवर्सिटी ने इस पिता-पुत्र की जोड़ी को विश्वविद्यालय परिसर में फॉसिल म्यूजियम स्थापित करने की जिम्मेदारी भी सौंपी थी।
भौतिकी और विज्ञान लेखन में भी छोड़ी अमिट छाप
प्रो. सोनी पंजाबी यूनिवर्सिटी के फेलो भी रहे और उन्होंने ‘स्पेशल थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी’ पर महत्वपूर्ण शोध कार्य किया। उनकी चर्चित पुस्तक ‘मैकेनिक्स एंड रिलेटिविटी’ के कई संस्करण प्रकाशित हुए और यह विद्यार्थियों के बीच काफी लोकप्रिय रही।
विज्ञान को आम लोगों तक सरल भाषा में पहुंचाने के लिए उन्होंने पंजाबी भाषा में अनेक पुस्तकें और लेख लिखे। वर्ष 2023 में उनकी चर्चित पुस्तक “दिलचस्प कहानी धरती अंबर दी” प्रकाशित हुई थी। इसके अलावा उन्होंने नेशनल ट्रांसलेशन मिशन के तहत जटिल वैज्ञानिक विषयों का सरल भाषा में अनुवाद कर विज्ञान के प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
प्रो. डॉ. विद्वान सिंह सोनी का जीवन शिक्षा, शोध और विज्ञान के प्रति समर्पण का अद्भुत उदाहरण रहा। भौतिकी के सिद्धांतों से लेकर लाखों वर्ष पुराने जीवाश्मों की खोज तक उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी।