वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक मेहर मलिक को पंजाब सरकार ने किया सम्मानित
फिरोजपुर/जालंधर : वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और पंजाबी साहित्यकार मेहर मलिक को मातृभाषा पंजाबी की सेवा और पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके लंबे योगदान के लिए पंजाब सरकार की ओर से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान 15 अगस्त को फिरोजपुर में आयोजित राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की ओर से प्रदान किया गया।
मेहर मलिक को यह सम्मान वर्ष 1970 से लेकर अब तक विभिन्न समाचार पत्रों और साहित्यिक मंचों के माध्यम से पंजाबी भाषा, साहित्य और पत्रकारिता की निरंतर सेवा करने के लिए दिया गया। उन्होंने अपने लेखन के जरिए न केवल पंजाबी भाषा को समृद्ध किया, बल्कि पंजाब की संस्कृति, परंपराओं और ग्रामीण जीवन को भी अपनी रचनाओं में जीवंत रूप से प्रस्तुत किया है।
पंजाबी साहित्य के क्षेत्र में मेहर मलिक अब तक सात पुस्तकें लिख चुके हैं। उनकी रचनाओं को पाठकों और साहित्य प्रेमियों से व्यापक सराहना मिली है। उनकी पहली पुस्तक ‘जिउंदे जी रंडेपा’ वर्ष 2016 में प्रकाशित हुई। इसके बाद ‘चन्नण लागी’ (2018), ‘भोली दा करवाचौथ’ (2019), ‘वेसवा’ (2021), ‘पंजेबां’ (2023) और ‘मैं किहा सी ना…’ (2025) सहित कई चर्चित पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त उनकी कई नई पुस्तकें भी प्रकाशन की प्रक्रिया में हैं।
समारोह के दौरान मेहर मलिक ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को अपनी पुस्तकों का सेट भेंट कर उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनके लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है तथा उन्हें पंजाबी भाषा और साहित्य की सेवा के लिए और अधिक उत्साह के साथ कार्य करने की प्रेरणा देगा।
गौरतलब है कि इससे पहले भी मेहर मलिक को उनके पत्रकारिता और साहित्यिक योगदान के लिए सम्मानित किया जा चुका है। 26 जनवरी 2025 को जालंधर जिला प्रशासन ने उन्हें मीडिया क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए जिला स्तरीय पुरस्कार प्रदान किया था।
सम्मान प्राप्त करने के बाद मेहर मलिक ने कहा कि उन्होंने अपनी पुस्तकों और लेखों के माध्यम से पंजाब के उन शब्दों, मुहावरों और सांस्कृतिक पहलुओं को सामने लाने का प्रयास किया है, जिन्हें आधुनिक समय में लोग धीरे-धीरे भूलते जा रहे हैं। उनकी रचनाओं में पंजाब की समृद्ध विरासत, लोक संस्कृति और ग्रामीण जीवन की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आधुनिक दौर में लोग अपनी मातृभाषा और गांवों से दूर होते जा रहे हैं, जबकि पंजाब की वास्तविक पहचान आज भी उसके गांवों, संस्कृति और लोक परंपराओं में बसती है। उन्होंने लोगों से अपनी भाषा, संस्कृति और मिट्टी से जुड़े रहने का आह्वान किया।
मेहर मलिक ने बताया कि वह आज भी पंजाब के विभिन्न समाचार पत्रों में नियमित रूप से लेखन कार्य कर रहे हैं और भविष्य में भी पंजाबी भाषा और साहित्य की सेवा के लिए समर्पित रहेंगे।