बाबा महाकाल का राजा स्वरूप में दिव्य श्रृंगार, भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर गुरुवार तड़के भगवान महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस दिव्य और अलौकिक दर्शन के लिए देशभर से आए हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में मौजूद रहे और बाबा महाकाल के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
प्रातःकाल भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच मंदिर के कपाट खोले गए। इसके पश्चात वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक कर बाबा का विशेष पूजन किया गया। पूजा-अर्चना के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया।
कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को मुकुट धारण कराया गया और उन्हें राजा स्वरूप में आकर्षक श्रृंगार से सजाया गया। त्रिपुंड, ड्राईफ्रूट्स और मनोहारी आभूषणों से सुसज्जित बाबा महाकाल का दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इसके बाद झांझ, मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच पारंपरिक भस्म आरती संपन्न हुई।
जैसे ही बाबा महाकाल ने भक्तों को दर्शन दिए, पूरा मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल” के उद्घोष से गूंज उठा। घंटियों की मधुर ध्वनि, शंखनाद और वैदिक मंत्रों ने वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने आराध्य देव के दर्शन के लिए रात से ही कतारों में खड़े रहे।
महाकाल मंदिर की प्राचीन परंपरा के अनुसार भस्म आरती में शामिल होने वाले पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।
महाकाल की भस्म आरती न केवल उज्जैन की धार्मिक पहचान है, बल्कि सनातन परंपरा और आस्था का अद्भुत प्रतीक भी है, जिसे देखने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु देश-विदेश से उज्जैन पहुंचते हैं।