जालंधर नगर निगम की तहबाजारी शाखा में लंबे समय से चल रही अनियमितताओं और भ्रष्टाचार पर अब प्रशासन ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। हालिया चेकिंग अभियान में सामने आए तथ्यों ने पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मेयर वनीत धीर और निगम कमिश्नर संदीप ऋषि के निर्देशों पर शाखा में बड़ा फेरबदल किया गया है। लगभग पूरा स्टाफ बदला गया, जबकि सुपरिटेंडेंट संजीव कालिया को पद पर बरकरार रखते हुए पूरी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
चेकिंग में क्या सामने आया
संजीव कालिया की अगुवाई में टीम ने नामदेव चौक, सर्किट हाउस और बस स्टैंड इलाके में विशेष अभियान चलाया। करीब 57 रेहड़ी-खोखा संचालकों से बातचीत में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए—
- सिर्फ 7–8 लोगों ने कहा कि उन्हें फीस की आधिकारिक रसीद मिलती है
- करीब 50 लोगों ने ऑन रिकॉर्ड बताया कि उनसे नकद पैसे लिए जाते हैं, लेकिन कोई रसीद नहीं दी जाती
यह रिपोर्ट मेयर और कमिश्नर को सौंप दी गई है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि तहबाजारी वसूली में बड़े स्तर पर गड़बड़ी हो रही थी।
सालों से उठ रहे थे सवाल
तहबाजारी शाखा पर भ्रष्टाचार के आरोप कोई नए नहीं हैं। पिछले कई वर्षों से इस पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई। अब जाकर निगम प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है।
प्राइवेट कंपनी को सौंपा जा सकता है काम
सूत्रों के मुताबिक, नगर निगम अब तहबाजारी का पूरा काम प्राइवेट कंपनी को देने की तैयारी कर रहा है। प्रस्ताव के तहत कंपनी को—
- शहर में सभी रेहड़ी-फड़ी का सर्वे
- उनकी गिनती
- फीस की वसूली
जैसी जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी।
करोड़ों का नुकसान
अनुमान है कि शहर में 20–25 हजार से ज्यादा रेहड़ी-फड़ी संचालित हो रही हैं, जिससे निगम को सालाना 20–25 करोड़ रुपए की आय होनी चाहिए। लेकिन मौजूदा वसूली 2 करोड़ रुपए तक भी नहीं पहुंच पा रही—जो बड़े पैमाने पर राजस्व नुकसान की ओर इशारा करता है।
आगे की रणनीति
निगम प्रशासन का मानना है कि अगर वसूली को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया जाए, तो भ्रष्टाचार पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। साथ ही, फीस न देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई—जैसे रेहड़ियां जब्त करना—भी प्रस्तावित है।
👉 कुल मिलाकर, यह कार्रवाई जालंधर नगर निगम के लिए एक बड़े सुधार की शुरुआत मानी जा रही है, लेकिन असली परीक्षा इस बात की होगी कि नई व्यवस्था कितनी पारदर्शी और प्रभावी साबित होती है।