करोड़ों के सीवरेज सफाई टेंडरों पर कांग्रेस का बड़ा सवाल
कांग्रेस नेताओं ने लगाए अनियमितताओं के आरोप, टेंडर से लेकर गाद के निपटारे तक जांच की मांग
जालंधर। पंजाब के निकाय विभाग (लोकल बॉडीज) की ओर से विभिन्न शहरों में सुपर-सक्शनिंग मशीनों के जरिए सीवरेज सफाई के लिए जारी किए गए करोड़ों रुपये के टेंडरों को लेकर कांग्रेस ने सरकार को घेरा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जुनियर अवतार हैनरी बावा और जिला शहरी कांग्रेस कमेटी के प्रधान एवं पूर्व विधायक राजिंदर बेरी ने टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद शहरों में लोगों को सीवरेज ब्लॉकेज की समस्या से पूरी तरह राहत नहीं मिल रही। उनका सवाल था कि यदि इतने बड़े स्तर पर सीवरेज सफाई के टेंडर दिए जा रहे हैं तो जमीनी स्तर पर इसका असर क्यों नजर नहीं आ रहा। नेताओं ने सीवरेज से निकाली जाने वाली गाद के रिकॉर्ड, उठान और निपटारे की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए।
पूर्व विधायक राजिंदर बेरी ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय सीवरेज सफाई के काम की निगरानी के लिए कर्मचारियों की ओर से मौके पर जाकर सफाई की पुष्टि की जाती थी। उनके मुताबिक, ऑक्सीजन सिलेंडर से लैस कर्मचारी सीवरेज लाइन में जाकर सफाई की वीडियोग्राफी तक करते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था में नगर निगम स्टाफ की ओर से काम की निगरानी और सत्यापन पर्याप्त स्तर पर नहीं किया जा रहा।
165 से 200 करोड़ के टेंडरों पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि प्रदेश के विभिन्न शहरों में करीब 165 से 200 करोड़ रुपये के सीवरेज सफाई कार्यों के टेंडर इंदरजीत बजाज और ब्राइट वे नामक कंपनियों को दिए गए हैं। उन्होंने टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने और स्वतंत्र जांच करवाने की मांग की।
नेताओं ने जालंधर उत्तरी विधानसभा क्षेत्र में करीब 10 करोड़ रुपये के काम का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि शुरुआती टेंडर में अनुभव की शर्त करीब 5 करोड़ रुपये के काम के अनुभव से जुड़ी थी। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि बाद में नियमों में बदलाव करते हुए वर्ष 2026 तक के काम का प्रावधान जोड़ा गया, जिससे कथित तौर पर कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने की गुंजाइश बनी।
कांग्रेस नेताओं के अनुसार, बठिंडा में करीब 60 करोड़ रुपये, जबकि जालंधर में पहले 30 करोड़ और बाद में 25 करोड़ रुपये के सीवरेज सफाई संबंधी टेंडर जारी किए गए हैं।
टेंडर, काम की गुणवत्ता और भुगतान की जांच की मांग
कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि पूरे टेंडर रिकॉर्ड, संबंधित कंपनियों की पात्रता, अनुभव की शर्तों में हुए बदलाव, मौके पर हुए काम की गुणवत्ता, मशीनों के वास्तविक इस्तेमाल, सीवरेज से निकली गाद के उठान व निपटारे तथा कंपनियों को किए गए भुगतान की स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवाई जाए।
उन्होंने कहा कि यदि जांच के दौरान टेंडर प्रक्रिया या काम में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित कंपनियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनका सवाल किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि करोड़ों रुपये के सरकारी खर्च के बदले लोगों को वास्तविक राहत और काम की पारदर्शिता सुनिश्चित करने का है।