पूर्व SGPC सदस्य अमरजीत सिंह चावला के घर पुलिस की छापेमारी, पत्नी से पूछताछ; आरोपी नहीं मिला
लुधियाना: शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के पूर्व वरिष्ठ सदस्य अमरजीत सिंह चावला के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म के मामले में पंजाब पुलिस ने जांच तेज कर दी है। रविवार सुबह श्री आनंदपुर साहिब पुलिस की विशेष टीम ने लुधियाना के मॉडल टाउन एक्सटेंशन स्थित चावला के आवास पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान अमरजीत सिंह चावला घर पर मौजूद नहीं मिले।
पुलिस टीम में करीब 10 से 15 अधिकारी और कर्मचारी शामिल बताए जा रहे हैं, जो तीन सरकारी वाहनों में लुधियाना पहुंचे। घर में महिलाओं की मौजूदगी को देखते हुए टीम के साथ महिला पुलिसकर्मी भी मौजूद थीं। पुलिस ने आवास की तलाशी लेने के साथ चावला की पत्नी से पूछताछ की।
जानकारी के मुताबिक पुलिस की कार्रवाई सुबह करीब 8:30 बजे शुरू हुई। टीम ने घर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था संभालते हुए अंदर तलाशी अभियान चलाया। पुलिस की ओर से मामले से संबंधित दस्तावेजों और अन्य संभावित साक्ष्यों की भी जांच किए जाने की बात सामने आई है।
फरवरी से अगस्त 2026 के बीच का मामला
पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता महिला मूल रूप से पंजाब की रहने वाली है और पिछले करीब 25 वर्षों से बहरीन में रह रही है। दर्ज एफआईआर में महिला ने आरोप लगाया है कि 27 फरवरी से 19 अगस्त 2026 के बीच श्री आनंदपुर साहिब की यात्रा के दौरान उसका संपर्क अमरजीत सिंह चावला से हुआ।
शिकायत में महिला ने आरोप लगाया कि उसे अलग-अलग सरायों और कमरों में ले जाया गया तथा उसकी इच्छा के विरुद्ध दुष्कर्म किया गया। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने पर उसे धमकियां दी गईं।
शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर आत्महत्या का प्रयास करने की बात भी पुलिस को बताई है। उसके अनुसार, एक सेवादार की नजर पड़ने के बाद उसे समय रहते अस्पताल पहुंचाया गया।
शिकायत के बाद दर्ज हुआ मामला
महिला का कहना है कि उसने कथित घटना को लेकर पंथक स्तर पर भी न्याय की गुहार लगाई, लेकिन सुनवाई न होने के बाद उसने पुलिस का रुख किया। इसके बाद श्री आनंदपुर साहिब पुलिस ने उसकी शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
फिलहाल पुलिस की छापेमारी और तलाशी की कार्रवाई जारी है। अमरजीत सिंह चावला की मौजूदगी न मिलने के बाद पुलिस उनकी तलाश और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।