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युवाओं में बढ़ रही बिंज वॉचिंग की आदत, नींद और मानसिक सेहत पर पड़ रहा असर: पंजाबी यूनिवर्सिटी की रिसर्च

12 Oct 2026 | 159 Views

युवाओं में बढ़ रही बिंज वॉचिंग की आदत, नींद और मानसिक सेहत पर पड़ रहा असर: पंजाबी यूनिवर्सिटी की रिसर्च

युवाओं में बढ़ रही बिंज वॉचिंग की आदत, नींद और मानसिक सेहत पर पड़ रहा असर: पंजाबी यूनिवर्सिटी की रिसर्च

पटियाला: मोबाइल पर लगातार वीडियो देखने की आदत युवाओं की नींद और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। मनोरंजन के लिए शुरू होने वाली यह आदत कब दिनचर्या का हिस्सा बनकर लत का रूप ले लेती है, इसका अंदाजा भी नहीं होता। पंजाबी यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञान विभाग के एक शोध में लगातार वीडियो देखने यानी बिंज वॉचिंग और अनिद्रा के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट के बीच संबंध सामने आया है।

18 से 25 वर्ष के युवाओं पर किया गया अध्ययन

इस शोध को मनोविज्ञान विभाग की शोधार्थी डॉ. अमृत कौर हांस ने प्रो. हरप्रीत कौर के मार्गदर्शन में पूरा किया। अध्ययन में पंजाब के विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले 18 से 25 वर्ष की आयु के विद्यार्थियों को शामिल किया गया।

शोध के शुरुआती चरण में 1,170 प्रतिभागियों से आंकड़े जुटाए गए। निर्धारित मानकों के आधार पर 668 युवाओं के आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण किया गया। शोध के निष्कर्षों के अनुसार, वीडियो देखना शुरुआत में मनोरंजन और आराम का साधन हो सकता है, लेकिन इसका अनियंत्रित इस्तेमाल नींद के सामान्य चक्र और मानसिक तंदुरुस्ती पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

बिस्तर पर मोबाइल चलाने से बिगड़ रहा सोने का समय

शोध में सामने आया कि बिस्तर पर लेटकर लंबे समय तक ऑनलाइन वीडियो देखना और समय पर मोबाइल बंद न कर पाना युवाओं की नींद से जुड़ी समस्याओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। देर रात तक स्क्रीन से जुड़े रहने के कारण सोने का समय प्रभावित होता है और पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता।

इस समस्या का एक पहलू माइंडफुलनेस यानी अपनी आदतों, विचारों और व्यवहार के प्रति सजगता की कमी भी है। कई बार युवाओं को यह महसूस नहीं होता कि लगातार स्क्रीन देखने में बिताया गया समय उनकी दिनचर्या और मानसिक स्थिति को किस तरह प्रभावित कर रहा है।

आभासी दुनिया में व्यस्तता, वास्तविक रिश्तों से दूरी

लगातार डिजिटल सामग्री देखने और वर्चुअल दुनिया में अधिक समय बिताने से वास्तविक सामाजिक संपर्कों के लिए समय कम हो सकता है। इससे कुछ युवाओं में अकेलेपन और सामाजिक अलगाव की भावना बढ़ने की आशंका रहती है। शोध ऐसे डिजिटल व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध को समझने की जरूरत पर जोर देता है।

डिजिटल आदतों में संतुलन जरूरी: प्रो. हरप्रीत कौर

शोध की मार्गदर्शक प्रो. हरप्रीत कौर ने युवाओं को डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल में संतुलन बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने नियमित समय पर सोने, रात में मोबाइल और अन्य गैजेट्स से दूरी बनाने तथा परिवार और दोस्तों के साथ वास्तविक जीवन में समय बिताने जैसे उपायों के महत्व पर जोर दिया।

वहीं, पंजाबी यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. जगदीप सिंह ने इस अध्ययन के लिए शोधार्थी डॉ. अमृत कौर हांस और प्रो. हरप्रीत कौर को बधाई दी। उन्होंने कहा कि मीडिया और डिजिटल उपकरणों के अनियंत्रित इस्तेमाल के मनो-सामाजिक प्रभाव आज युवाओं के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय हैं। ऐसे शोध लोगों को जागरूक करने और स्वस्थ डिजिटल आदतें अपनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

संदेश साफ है: तकनीक का इस्तेमाल जरूरी है, लेकिन उसकी वजह से नींद, मानसिक सुकून और वास्तविक जिंदगी के रिश्तों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।

Published on: 12 Oct 2026

Global Admin
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