जालंधर में 1.15 लाख स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव पर संकट! HPL कंपनी के करीब 2 करोड़ रुपये बकाया
एक साल से भुगतान न मिलने का दावा, त्योहारी सीजन में बंद पड़ी लाइटों को लेकर बढ़ सकती है परेशानी; मार्च 2027 में खत्म होगा पांच साल का कांट्रैक्ट
जालंधर: शहर की करीब 1.15 लाख एलईडी स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव की जिम्मेदारी संभाल रही एचपीएल कंपनी की करीब 2 करोड़ रुपये की पेमेंट नगर निगम के पास बकाया बताई जा रही है। कंपनी के अनुसार, पिछले करीब एक साल से भुगतान नहीं हुआ है। ऐसे में त्योहारी सीजन के दौरान स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव और मरम्मत को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।
जानकारी के मुताबिक, एचपीएल कंपनी शहर में स्ट्रीट लाइटों की देखभाल के लिए 35 टीमें तैनात किए हुए है, जिनमें करीब 80 कर्मचारी काम कर रहे हैं। पहले कंपनी के जिम्मे लगभग 77 हजार स्ट्रीट लाइटों का रखरखाव था, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर करीब 1.15 लाख हो गई है। लाइटों की संख्या बढ़ने के साथ ही कंपनी के कामकाज और रखरखाव की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है।
मार्च 2027 में खत्म होगा पांच साल का कांट्रैक्ट
नगर निगम और एचपीएल कंपनी के बीच स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव को लेकर हुआ पांच साल का कांट्रैक्ट मार्च 2027 में समाप्त होने जा रहा है। कंपनी ने नगर निगम से कांट्रैक्ट की अवधि बढ़ाने की मांग की है। बताया जा रहा है कि कंपनी इस काम को केवल एक साल के लिए नहीं, बल्कि अगले तीन या पांच साल के लिए जारी रखने की इच्छुक है।
शहर में 4500 से 5000 स्ट्रीट लाइटें बंद होने की चर्चा
शहर में इस समय करीब 4500 से 5000 स्ट्रीट लाइटें बंद होने की बात सामने आई है। हालांकि, कंपनी का कहना है कि कुल 1.15 लाख लाइटों की तुलना में इतनी लाइटों का बंद होना सामान्य स्थिति है। इसके बावजूद, बंद पड़ी लाइटों की मरम्मत और शहर की सड़कों पर पर्याप्त रोशनी बनाए रखना एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
नगर निगम के सामने दोहरी चुनौती
एक तरफ शहर की स्ट्रीट लाइटों की नियमित देखभाल सुनिश्चित करना जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ एचपीएल कंपनी की बकाया पेमेंट और कांट्रैक्ट बढ़ाने की मांग पर भी फैसला लेना होगा। त्योहारी सीजन में सड़कों, बाजारों और प्रमुख इलाकों में रोशनी की जरूरत बढ़ जाती है। ऐसे में भुगतान में देरी का रखरखाव सेवाओं पर क्या असर पड़ता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
अब सवाल यह है कि नगर निगम बकाया राशि के भुगतान और कांट्रैक्ट की अवधि बढ़ाने के संबंध में कब तक निर्णय लेता है, ताकि शहर की स्ट्रीट लाइटों का रखरखाव प्रभावित न हो और लोगों को अंधेरी सड़कों की समस्या का सामना न करना पड़े।