🔥 घर का भेदी लंका ढाए! जालंधर का ‘मैरी टाऊन’ होटल बेनकाब — पार्टनर ने खोले काले राज, मामला पहुंचा चंडीगढ़
जालंधर (मेरा भारत): जालंधर के बाहरी इलाके में खड़ा ‘मैरी टाऊन’ होटल अब सिर्फ एक बिल्डिंग नहीं, बल्कि कथित भ्रष्टाचार, अवैध निर्माण और अंदरूनी विश्वासघात की जिंदा मिसाल बनता जा रहा है।
जिस होटल में सालों तक “सब सेट” चलता रहा, वहीं अब अपने ही पार्टनर ने पूरी पोल खोल दी — और फाइल सीधी सत्ता के गलियारों तक पहुंचा दी।
💣 पार्टनर बना ‘व्हिसलब्लोअर’, ले गया फाइलों का बम चंडीगढ़
अंदरखाने की लड़ाई ने ऐसा मोड़ लिया कि एक पार्टनर ने ही होटल की कथित गड़बड़ियों की पूरी फाइल उठाई और सीधे चंडीगढ़ पहुंच गया।
सूत्र बताते हैं—
“लड़ाई भले खत्म दिख रही हो, लेकिन बदला अभी बाकी है… और अब वार सीधा सिस्टम पर किया गया है।”
🚫 बिना NOC, ऊपर से अवैध मंजिलें — नीचे गंदगी का खेल!
होटल पर लगे आरोप किसी छोटे-मोटे नियम तोड़ने के नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को चुनौती देने वाले हैं:
- ❌ बिना NOC के संचालन
- 🏗️ ऊपर की मंजिलें अवैध तरीके से तैयार
- 🚱 सीवरेज सिस्टम तक नहीं
- 🚛 रात के अंधेरे में टैंकरों से गंदगी नहरों में फेंकने का खेल
यानि बाहर से चमक-दमक… और अंदर से गंदगी का साम्राज्य!
⚖️ अब बारी NGT की — गिरेगा ‘मैरी टाऊन’?
मामला अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) तक पहुंचाने की तैयारी में है।
याद दिलाया जा रहा है कि होटल पार्क प्लाजा पर भी इसी तरह की कार्रवाई हो चुकी है।
अगर जांच बैठी, तो:
- सीलिंग
- भारी जुर्माना
- और यहां तक कि पूरी बिल्डिंग पर बुलडोज़र भी चल सकता है
🧨 राजनीतिक और निगम कनेक्शन भी शक के घेरे में
सबसे बड़ा सवाल यही है—
👉 इतने सालों तक ये सब चलता रहा, तो किसकी शह पर?
सूत्र इशारा कर रहे हैं:
- निगम के अंदरूनी गठजोड़
- राजनीतिक संरक्षण
- और “मिलीभगत का पूरा नेटवर्क”