सुनील जाखड़ अपनी कुर्सी बचाने के लिए पंजाब की युवा शक्ति का अपमान करना बंद करें: बलतेज पन्नू
*पंजाब के बच्चे गैंग नहीं, बल्कि नीट और जेईई की सफलता की चर्चा करते हैं: पन्नू
*भाजपा शासित राज्यों के लोग भी अब पंजाब की मुफ्त बिजली और पारदर्शी नौकरियों की मिसाल दे रहे हैं: पन्नू*
जाखड़ साहब दिल्ली का चश्मा उतारो, तभी पंजाब में हो रहा विकास नज़र आएगा: बलतेज पन्नू
चंडीगढ़ 6 अपैल
आम आदमी पार्टी (आप)पंजाब के स्टेट मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि जाखड़ साहब को अपनी प्रधानगी की कुर्सी बचाने की इतनी चिंता सता रही है कि उन्हें अब पंजाब में कुछ भी सकारात्मक नज़र आना बंद हो गया है।
पन्नू ने कहा कि जाखड़ साहब का यह दावा कि पंजाब के बच्चे एक-दूसरे से उनके 'गैंग' के बारे में पूछते हैं, बेहद शर्मनाक और पंजाब की युवा शक्ति का अपमान है।
बलतेज पन्नू ने कहा कि जाखड़ साहब, पंजाब के बच्चे अब गैंगों के बारे में नहीं, बल्कि एक-दूसरे से यह पूछते हैं कि तुमने नीट और जेईई की परीक्षा कैसे पास की? आज का युवा चर्चा करता है कि बिना किसी सिफारिश और बिना एक रुपया रिश्वत दिए, मान सरकार द्वारा दी गई 65,000 सरकारी नौकरियों में पारदर्शी तरीके से भर्ती कैसे हुई? पंजाब का माहौल बदल चुका है, लेकिन जाखड़ साहब अभी भी पुरानी और नकारात्मक राजनीति में फंसे हुए हैं।
पन्नू ने कहा कि आज देश के दूसरे राज्य पंजाब की उपलब्धियों से सीख रहे हैं। पड़ोसी राज्यों के लोग पूछ रहे हैं कि पंजाब में एसएसएफ जैसी शानदार पहल कैसे शुरू हुई? हरियाणा और राजस्थान जैसे भाजपा शासित राज्यों के लोग आज पंजाबियों से सवाल करते हैं कि उन्हें 600 यूनिट मुफ्त बिजली का लाभ कैसे मिल रहा है, जबकि उनके अपने राज्यों में बिजली महंगी है। यहाँ तक कि पड़ोसी राज्यों के किसान भी हैरान हैं कि पंजाब के किसानों को दिन के समय निर्बाध बिजली और नहरों के अंतिम छोर (टेल) तक पानी कैसे मिल रहा है।
पन्नू ने जाखड़ को नसीहत देते हुए कहा कि केवल नकारात्मकता फैलाकर कोई सत्ता हासिल नहीं कर सकता। पंजाब के लोग जानते हैं कि ज़मीनी हकीकत क्या है। राज्य में तेज़ी से औद्योगिकीकरण हो रहा है,लुधियाना में टाटा स्टील जैसी दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी स्थापित हो चुकी है, जहाँ स्थानीय लोगों को बड़े स्तर पर रोज़गार मिल रहा है।
बलतेज पन्नू ने कहा कि अगर जाखड़ साहब वाकई पंजाब का भला चाहते हैं, तो उन्हें पंजाब को 'दिल्ली की नज़र' से देखना बंद करना होगा। जिस दिन वह दिल्ली का चश्मा उतारकर पंजाबियों की नज़र से देखेंगे, उन्हें पंजाब में चारों ओर हो रहा विकास और सकारात्मक बदलाव खुद-ब-खुद नज़र आने लगेगा।