नीति आयोग में पंजाब की जोरदार पैरवी: मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मांगा विशेष राज्य का दर्जा और सरहदी क्षेत्रों के लिए विशेष पैकेज
नई दिल्ली, 11 जून।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने नीति आयोग की बैठक में राज्य के लंबे समय से लंबित मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए केंद्र सरकार से पंजाब को विशेष श्रेणी का दर्जा (स्पेशल कैटेगरी स्टेटस) देने और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए विशेष आर्थिक पैकेज प्रदान करने की मांग की। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा में अग्रिम पंक्ति में खड़े पंजाब को उसकी राष्ट्रीय भूमिका के अनुरूप सहयोग नहीं मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान के साथ 553 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करने वाला पंजाब आतंकवाद, ड्रोन के जरिए हथियार और नशे की तस्करी, बाढ़ तथा लगातार सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसके बावजूद राज्य को अपेक्षित वित्तीय और विकासात्मक सहायता नहीं मिल रही।
पंजाब को मिले 90:10 फंडिंग मॉडल
मान ने मांग की कि पहाड़ी राज्यों, उत्तर-पूर्वी राज्यों और जम्मू और कश्मीर की तर्ज पर पंजाब को भी सभी केंद्र प्रायोजित योजनाओं में 90:10 के अनुपात में फंडिंग दी जाए। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती राज्य होने के कारण पंजाब अतिरिक्त सुरक्षा और आर्थिक बोझ उठा रहा है, इसलिए विशेष श्रेणी का दर्जा उसका अधिकार है।
'वाइब्रेंट विलेज-II' योजना में पंजाब की उपेक्षा
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की 'वाइब्रेंट विलेज-II' योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि पंजाब के 2,000 से अधिक सीमावर्ती गांवों और कस्बों में से केवल 107 गांवों को ही इस योजना में शामिल किया गया है। उन्होंने इसे सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि इन गांवों को विशेष विकास योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए।
विकसित भारत के लिए सुरक्षित पंजाब जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘विकसित भारत-2047’ का सपना तभी साकार हो सकता है जब पंजाब सुरक्षित, समृद्ध और खुशहाल होगा। उन्होंने कहा कि पंजाब देश की सीमाओं की रक्षा के लिए हमेशा ढाल बनकर खड़ा रहा है और भविष्य में भी अपनी जिम्मेदारी निभाता रहेगा।
शिक्षा और स्वास्थ्य में पंजाब बना मॉडल
नीति आयोग के समक्ष पंजाब सरकार की उपलब्धियों को रखते हुए मान ने कहा कि नीति आयोग की शिक्षा गुणवत्ता रिपोर्ट 2026 में पंजाब देश की सर्वश्रेष्ठ स्कूली शिक्षा प्रणाली के रूप में उभरा है। उन्होंने बताया कि ‘मिशन समर्थ’, ‘हुनर शिक्षा स्कूल’ और ‘बिज़नेस ब्लास्टर्स’ जैसी योजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा, कौशल और उद्यमिता से जोड़ा जा रहा है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में उन्होंने कहा कि ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ के तहत राज्य का प्रत्येक परिवार प्रतिवर्ष 10 लाख रुपये तक के कैशलेस उपचार का हकदार है। इसके अलावा राज्य में 990 ‘आम आदमी क्लीनिक’ संचालित हो रहे हैं, जहां अब तक 5.54 करोड़ से अधिक मरीज उपचार प्राप्त कर चुके हैं।
नशामुक्त और कौशलयुक्त पंजाब पर जोर
मुख्यमंत्री ने ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि राज्यभर में 547 ओट क्लीनिक, 183 नशा मुक्ति केंद्र और 90 पुनर्वास केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। वहीं युवाओं को रोजगार योग्य बनाने के लिए आईटीआई सीटों में वृद्धि, हुनर शिक्षा स्कूल और सी-पाइट जैसे संस्थानों को मजबूत किया गया है।
मोहाली को राष्ट्रीय ज्ञान एवं नवाचार केंद्र बनाने की मांग
मान ने केंद्र सरकार से मोहाली को राष्ट्रीय ज्ञान एवं नवाचार क्षेत्र (National Knowledge and Innovation Region) घोषित करने तथा यहां एकीकृत सेमीकंडक्टर मेगा क्लस्टर स्थापित करने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि इससे पंजाब को देश के तकनीकी और औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बनाया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि पंजाब ने हमेशा राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखा है और अब समय आ गया है कि केंद्र सरकार भी राज्य के योगदान को उचित सम्मान देते हुए उसकी जायज मांगों को स्वीकार करे। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास, विशेष राज्य के दर्जे और वित्तीय सहायता से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक निर्णय लेगी।