पंजाब शिक्षा में नंबर-1 बना, केरल को छोड़ा पीछे: हरजोत बैंस
चंडीगढ़, 6 अगस्त। पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने विधानसभा में शिक्षा विभाग का चार साल का रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए दावा किया कि नीति आयोग के स्कूल एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स 2026 में पंजाब ने केरल को पीछे छोड़कर देश में पहला स्थान हासिल किया है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में प्रदेश के 8,000 सरकारी स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी, 3,200 स्कूलों में उपयोगी शौचालय नहीं थे और करीब 4 लाख विद्यार्थी जमीन पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर थे। अब 19,125 सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे के विकास पर 2,638 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जबकि आगे के सुधारों के लिए विश्व बैंक से 1,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मंजूरी भी मिली है।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि पंजाब देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने पहली से 12वीं कक्षा तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को मुख्य विषय के रूप में शुरू किया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में सरकारी स्कूलों के केवल 80 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की थी, जबकि वर्ष 2026 में यह संख्या बढ़कर 882 हो गई है।
बैंस ने बताया कि 'मिशन समरथ' के तहत विद्यार्थियों को उनकी सीखने की क्षमता के अनुसार पढ़ाया जा रहा है। इस कार्यक्रम से हर साल लगभग 12 लाख विद्यार्थी और 70 हजार से अधिक शिक्षक जुड़े हुए हैं।
विपक्ष पर निशाना साधते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि यदि आलोचना करनी है तो उनकी करें, लेकिन सरकारी स्कूलों को बदनाम न किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि झूठे प्रचार के कारण पहले लोगों का भरोसा सरकारी स्कूलों से उठा था, जिसे अब सरकार दोबारा मजबूत कर रही है।
सरकारी स्कूलों में दाखिले में कमी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह केवल पंजाब की नहीं, बल्कि कोविड-19 के बाद पूरे देश की स्थिति है। उन्होंने बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के सरकारी स्कूलों के दाखिले के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय स्तर की प्रवृत्ति है।
उन्होंने कहा कि 'अपार आईडी' लागू होने के बाद विद्यार्थियों के वास्तविक आंकड़े सामने आए हैं और अब एक ही विद्यार्थी का कई स्कूलों में फर्जी दाखिला संभव नहीं है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार सरकारी स्कूलों को लोगों की पहली पसंद बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि अब शिक्षकों को स्कूलों के लिए फंड मांगने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि सरकार समय पर आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है।