विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में बढ़ी अंदरूनी कलह, नेताओं की नाराजगी बनी चुनौती
नेतृत्व परिवर्तन की मांग ने बढ़ाई मुश्किलें, संगठनात्मक एकजुटता पर उठने लगे सवाल
जालंधर। पंजाब विधानसभा चुनाव में अब करीब सात महीने का समय शेष है, लेकिन उससे पहले ही कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। प्रदेश नेतृत्व में बदलाव न करने के पार्टी हाईकमान के फैसले के बाद कई नेताओं की नाराजगी सार्वजनिक रूप से सामने आई है, जिससे पार्टी की चुनौतियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं।
जानकारी के अनुसार, कांग्रेस हाईकमान ने हाल ही में पंजाब के वरिष्ठ नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें कर स्पष्ट किया था कि फिलहाल प्रदेश नेतृत्व में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। पार्टी को उम्मीद थी कि सभी नेता इस फैसले को स्वीकार कर संगठन को मजबूत करने की दिशा में काम करेंगे। इसके बाद संगठनात्मक नियुक्तियों की घोषणा भी की गई, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष के पद पर कोई परिवर्तन नहीं किया गया।
हाईकमान के इस निर्णय के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थन में कई विधायक, पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक एकत्र हुए तथा नेतृत्व परिवर्तन की मांग को लेकर शक्ति प्रदर्शन किया। इस घटनाक्रम ने पंजाब कांग्रेस में चल रही गुटबाजी को एक बार फिर चर्चा का विषय बना दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति कांग्रेस के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्ष 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद पार्टी नेतृत्व ने चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया था। ऐसे में अब चन्नी समर्थकों द्वारा नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठाए जाने से पार्टी के भीतर मतभेदों की तस्वीर स्पष्ट दिखाई दे रही है।
इसी बीच सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात और वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी की कथित नाराजगी ने भी राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है। इन घटनाओं को कांग्रेस के भीतर बढ़ती असहजता और असंतोष के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की है। यदि पार्टी समय रहते अपने अंदरूनी मतभेदों को दूर नहीं कर पाती है, तो इसका असर चुनावी तैयारियों और प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
वहीं, विपक्षी दल भी कांग्रेस की आंतरिक स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में पंजाब कांग्रेस की रणनीति और नेतृत्व की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।