99 अवैध कॉलोनियों में बिजली कनेक्शनों की जांच पर पावरकॉम सख्त, 10 जुलाई तक रिपोर्ट तलब
तीन महीने बाद भी जांच पूरी न होने पर मुख्यालय ने जारी किया अल्टीमेटम, तकनीकी दस्तावेज और नेटवर्क विवरण भी मांगा
जालंधर। पुडा और जालंधर डेवलपमेंट अथॉरिटी (जेडीए) के अधीन चिन्हित 99 अवैध कॉलोनियों में जारी बिजली कनेक्शनों और विकसित किए गए बिजली नेटवर्क की जांच को लेकर पावरकॉम मुख्यालय ने सख्त रुख अपना लिया है। करीब तीन माह पहले गठित जांच कमेटी द्वारा अब तक रिपोर्ट जमा नहीं किए जाने पर चीफ इंजीनियर ने कमेटी प्रमुख इंजीनियर राजेश कुमार को नया अल्टीमेटम जारी करते हुए 10 जुलाई तक हर हाल में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
गौरतलब है कि आरटीआई एक्टिविस्ट करणप्रीत की शिकायत के बाद पावरकॉम ने 99 अवैध कॉलोनियों में जारी बिजली कनेक्शनों, बिजली ढांचे और नियमों के पालन की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। कमेटी को एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन तीन महीने बीत जाने के बावजूद रिपोर्ट मुख्यालय तक नहीं पहुंच सकी।
सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में हो रही असामान्य देरी को गंभीरता से लेते हुए मुख्यालय ने दोबारा पत्र जारी किया है। चीफ इंजीनियर की ओर से भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि जांच रिपोर्ट 10 जुलाई तक हर स्थिति में जमा करवाई जाए। इसके साथ ही प्रत्येक कॉलोनी से संबंधित स्वीकृति दस्तावेज, बिजली कनेक्शनों का रिकॉर्ड, विकसित किए गए बिजली नेटवर्क का स्केच तथा अन्य तकनीकी विवरण भी रिपोर्ट के साथ प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यालय यह स्पष्ट करना चाहता है कि संबंधित कॉलोनियों में बिजली कनेक्शन किन आदेशों के आधार पर जारी किए गए, बिजली ढांचे के निर्माण के लिए आवश्यक मंजूरियां ली गई थीं या नहीं तथा पावरकॉम के नियमों का पालन किस स्तर तक किया गया। बताया जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि इन 99 कॉलोनियों को लेकर पहले भी विभिन्न विभागों को कई शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं। वर्ष 2022 में तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर एवं पुडा के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर द्वारा संबंधित कॉलोनाइजरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश भी की गई थी। बाद में बिजली कनेक्शनों को लेकर उठे सवालों के चलते पावरकॉम ने अलग से जांच शुरू की थी।
अब सभी की निगाहें 10 जुलाई की समय-सीमा पर टिकी हैं। यदि निर्धारित समय तक रिपोर्ट मुख्यालय को नहीं मिलती है तो जांच कमेटी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। वहीं रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि कार्रवाई केवल संबंधित कॉलोनाइजरों तक सीमित रहेगी या फिर उस समय की प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
इन क्षेत्रों में स्थित हैं अवैध कॉलोनियां
भोगपुर, आदमपुर, नकोदर, करतारपुर, पतारा, वडाला, चौगावां, लिद्दड़ां, बुलंदपुर, किशनगढ़, नंगल सलेमपुर, गदईपुर, वरियाना, कादियावाली, फोलड़ीवाल, जंडूसिंघा, मसंदा, रामूवाल, समस्तपुर, जौहल, रायपुर, जामशेर और अन्य क्षेत्रों में स्थित 99 कॉलोनियां जांच के दायरे में हैं। इन कॉलोनियों में बिजली कनेक्शन जारी करने और बिजली ढांचे के निर्माण को लेकर जांच की जा रही है।