जालंधर नॉर्थ में खुलेआम बिक रहा सिल्वर पेपर, नशे में इस्तेमाल होने की चर्चा से उठे सवाल
जालंधर नॉर्थ के कई मोहल्लों में खुलेआम 5 से 10 रुपये में सिल्वर पेपर (एल्यूमिनियम फॉयल) के छोटे-छोटे टुकड़े बेचे जाने की चर्चा स्थानीय स्तर पर जोर पकड़ रही है। लोगों का कहना है कि इन टुकड़ों को खरीदने वालों में सामान्य घरेलू उपभोक्ता कम दिखाई देते हैं, जबकि इन्हें खरीदने वाले कई ऐसे लोग होते हैं जिन पर नशा करने का संदेह व्यक्त किया जाता है।
शहर में पुलिस द्वारा लगातार नशे के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है और नशा तस्करों व नशा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है। इसके बावजूद एक महत्वपूर्ण सवाल सामने आ रहा है कि नशे के सेवन में कथित तौर पर इस्तेमाल होने वाला यह सिल्वर पेपर इतनी आसानी से कैसे उपलब्ध हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब नशा करने वालों को पकड़ा जाता है तो यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि उन्होंने नशे के सेवन में उपयोग होने वाली सामग्री कहां से प्राप्त की और उसे कौन बेच रहा है।
जानकारी के अनुसार, कई दुकानों पर पहले से काटकर रखे गए सिल्वर पेपर के छोटे-छोटे टुकड़े 5 और 10 रुपये में बेचे जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि इन टुकड़ों का उपयोग भोजन पैक करने की अपेक्षा नशे के सेवन में अधिक किया जा रहा है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या दुकानदारों को इसके संभावित दुरुपयोग की जानकारी है या फिर इस ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।
सामाजिक संगठनों और स्थानीय निवासियों का मानना है कि यदि नशे के खिलाफ अभियान को और अधिक प्रभावी बनाना है तो केवल नशा बेचने वालों और नशा करने वालों पर कार्रवाई तक ही प्रयास सीमित नहीं रहने चाहिए। उन साधनों और माध्यमों पर भी निगरानी रखी जानी चाहिए जिनका इस्तेमाल नशे के सेवन में किया जाता है।
खुलेआम बिक रहे सिल्वर पेपर के इन छोटे टुकड़ों की बिक्री पर निगरानी, इनके वितरण तंत्र की जांच तथा संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने की मांग भी उठने लगी है। फिलहाल यह मुद्दा क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग संबंधित विभागों से इस संबंध में आवश्यक जांच की अपेक्षा कर रहे हैं।