केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बयानों पर अमन अरोड़ा का तीखा पलटवार
चंडीगढ़ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पंजाब के कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बयानों पर जोरदार पलटवार करते हुए उन पर घटिया राजनीति और निजी कीचड़ उछालने का आरोप लगाया। अरोड़ा ने कहा कि बिट्टू को व्यक्तिगत हमलों की बजाय उनके उठाए गए सैद्धांतिक सवालों का जवाब देना चाहिए।
अमन अरोड़ा ने कहा कि आम आदमी पार्टी और पंजाब सरकार निकाय चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से करवाना चाहती थी, लेकिन धूरी और संगरूर में रवनीत बिट्टू द्वारा दिखाई गई कथित बदसलूकी और मारपीट से लोगों को निराशा हुई। उन्होंने कहा कि जब पार्टी ने इस पर सवाल उठाए तो जवाब देने की बजाय बिट्टू ने व्यक्तिगत और पारिवारिक टिप्पणियां शुरू कर दीं।
पंजाब पुलिस को लेकर बिट्टू के बयानों पर हमला बोलते हुए अरोड़ा ने पूछा कि यदि पंजाब पुलिस इतनी खराब है तो कांग्रेस सरकार के दौरान 2017 में उन्होंने नियमों को दरकिनार कर अपने भाई गुरइकबाल सिंह हनी को सीधे डीएसपी क्यों लगवाया। उन्होंने सवाल उठाया कि पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह पर हुए बम धमाके में शहीद हुए अन्य 17 पुलिसकर्मियों और पीड़ित परिवारों को समान राहत क्यों नहीं दिलाई गई।
दल-बदलू वाले आरोप पर अरोड़ा ने कहा कि उन्होंने 2016 में सिद्धांतों के लिए कांग्रेस छोड़ी और आम आदमी पार्टी में शामिल हुए, जबकि बिट्टू ने लोकसभा चुनाव हारने के बाद सत्ता के लालच में कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया।
अमन अरोड़ा ने बिट्टू द्वारा उन्हें “कपूत” कहे जाने पर भावुक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह “कपूत हैं या सुपुत्र”, इसका जवाब उनके दिवंगत पिता ही दे सकते हैं या फिर बिट्टू सुनाम जाकर उनकी बीमार मां से पूछ सकते हैं। उन्होंने अपने पिता भगवान दास अरोड़ा की आत्महत्या का जिक्र करते हुए कहा कि परिवार को तोड़ने और मानसिक तनाव देने में उनके रिश्तेदार राजेंद्र दीपा की बड़ी भूमिका रही।
जमीन कब्जाने के आरोपों को खारिज करते हुए अरोड़ा ने रवनीत बिट्टू को खुली चुनौती दी कि यदि उनके मंत्री रहते पंजाब में एक इंच जमीन पर भी अवैध कब्जे का सबूत मिल जाए तो वह जमीन बिट्टू के नाम कर देंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी राजनीतिक विरोधी से “कैरेक्टर सर्टिफिकेट” की जरूरत नहीं, क्योंकि सुनाम की जनता ने उन्हें रिकॉर्ड 75,277 वोटों से जिताकर अपना विश्वास दिखाया है।
अरोड़ा ने यह भी कहा कि पंजाब के लोग व्यक्तिगत हमलों और परिवारों को निशाना बनाने वाली राजनीति को पसंद नहीं करते। उन्होंने अपील की कि राजनीतिक मतभेदों को व्यक्तिगत स्तर तक ले जाने की बजाय मुद्दों और नीतियों पर बहस होनी चाहिए।