चंडीगढ़, 4 जून : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि पर रोक लगाने की घोषणा के 24 घंटे के भीतर पंजाब सरकार ने इस फैसले को कानूनी रूप देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। स्कूल शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र लिखकर निजी स्कूलों की फीस को नियमित करने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कानून का मसौदा तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
प्रस्तावित कानून के तहत निजी स्कूलों को सालाना 5 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही जिन स्कूलों ने पिछले तीन वर्षों में निर्धारित 15 प्रतिशत सीमा से अधिक फीस वृद्धि की है, उन्हें अभिभावकों से वसूली गई अतिरिक्त राशि वापस करनी होगी।
हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि पंजाब के लगभग 7,800 निजी स्कूलों में पढ़ने वाले 32 लाख से अधिक विद्यार्थियों और उनके परिवारों को मनमानी फीस वृद्धि से बचाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा कोई व्यापार नहीं बल्कि समाज सेवा का क्षेत्र है और इसमें मुनाफाखोरी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार शिक्षा को सभी के लिए सुलभ और किफायती बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट भी कई बार स्पष्ट कर चुका है कि निजी शिक्षण संस्थानों को उचित फीस लेने का अधिकार है, लेकिन शिक्षा का व्यावसायीकरण और अत्यधिक मुनाफाखोरी स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि सरकार एक मजबूत और पारदर्शी नियामक ढांचा तैयार कर रही है, जिससे निजी स्कूलों की जवाबदेही तय होगी और अभिभावकों को आर्थिक राहत मिलेगी। विभाग को इस संबंध में जल्द से जल्द व्यापक प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैंस ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 2019 में लागू किए गए प्रावधानों के कारण निजी स्कूलों को फीस बढ़ाने की खुली छूट मिल गई थी। स्कूलों को केवल नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर जानकारी प्रदर्शित कर फीस ढांचे में बदलाव की अनुमति थी, जिससे अभिभावकों पर लगातार आर्थिक बोझ बढ़ता गया।
उन्होंने कहा कि भगवंत मान सरकार का नया कानून इस व्यवस्था को समाप्त कर निजी स्कूलों की जवाबदेही सुनिश्चित करेगा तथा विद्यार्थियों और अभिभावकों को अतिरिक्त फीस के बोझ से राहत दिलाएगा।