बाबा फरीद यूनिवर्सिटी में 500 करोड़ के घोटाले का आरोप, परगट सिंह ने जांच की मांग उठाई
पंजाब के पूर्व शिक्षा मंत्री एवं जालंधर कैंट से विधायक परगट सिंह ने बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, फरीदकोट में करीब 500 करोड़ रुपए के कथित घोटाले का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से इसकी निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की है। जालंधर स्थित कांग्रेस भवन में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान परगट सिंह ने कई दस्तावेज पेश करते हुए दावा किया कि यूनिवर्सिटी में खरीद, निर्माण कार्य, भर्तियों और प्रशासनिक नियुक्तियों सहित विभिन्न स्तरों पर अनियमितताएं हुई हैं।
परगट सिंह ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. राजीव सूद के कार्यकाल में कई वित्तीय फैसलों पर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि 100 करोड़ रुपए से अधिक के कार्य एक निजी कंपनी को कथित तौर पर बिना टेंडर प्रक्रिया के आवंटित किए गए और कार्य पूरा न होने के बावजूद भुगतान जारी कर दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मेडिकल उपकरणों की खरीद में बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं।
कांग्रेस विधायक ने दावा किया कि एक स्कैन मशीन लगभग 55 करोड़ रुपए में खरीदी गई, जबकि उसकी बाजार कीमत इससे काफी कम बताई जा रही है। इसी प्रकार एमआरआई मशीन की खरीद को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए और कहा कि अन्य सरकारी संस्थानों की तुलना में अधिक कीमत पर खरीद की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि आईसीयू बेड, एसटीपी प्लांट और अन्य उपकरणों की खरीद में भी नियमों की अनदेखी की गई।
प्रेस वार्ता में मौजूद कैंसर विशेषज्ञ डॉ. मनजीत सिंह ने भी यूनिवर्सिटी में कथित अनियमितताओं को लेकर कई मुद्दे उठाए। उन्होंने दावा किया कि विभिन्न मामलों में जांच की मांग को लेकर शिकायतें दी गई हैं और संबंधित दस्तावेज भी उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच होनी चाहिए।
परगट सिंह ने कुछ नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि राजनीतिक प्रभाव के आधार पर रिश्तेदारों और परिचितों को नौकरियां दी गईं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इन आरोपों को गलत मानती है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर रिपोर्ट सार्वजनिक करे।
उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से मांग की कि मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए और जांच रिपोर्ट पंजाब विधानसभा में पेश की जाए ताकि तथ्यों की पूरी तस्वीर सामने आ सके। उन्होंने कहा कि यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो जिम्मेदारी तय की जाए और यदि अनियमितताएं सामने आती हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
हालांकि, समाचार लिखे जाने तक बाबा फरीद यूनिवर्सिटी, पंजाब सरकार या आरोपों में नामित व्यक्तियों की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। मामले की सत्यता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।