होटल रेडिसन में लगी एग्जीबिशन पर उठे गंभीर सवाल, बिलिंग से लेकर सुरक्षा व्यवस्था तक जांच की मांग
जालंधर/ओबेरॉय। देश में त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ ही शहरों में विभिन्न प्रकार की सेल और एग्जीबिशन का दौर भी तेज हो गया है। जालंधर के एक प्रमुख होटल में शनिवार से शुरू हुई एक एग्जीबिशन को लेकर टैक्स अनुपालन, बिलिंग व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, होटल रेडिसन में आयोजित इस एग्जीबिशन में करीब 70 स्टॉल लगाए गए हैं। आयोजकों द्वारा दिल्ली के चांदनी चौक, सदर बाजार, पालिका बाजार, गफ्फार मार्केट सहित अन्य बाजारों से विभिन्न प्रकार का सामान लाकर बिक्री किए जाने की बात सामने आ रही है। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कई उत्पादों पर कथित तौर पर पहले अधिक कीमत दर्शाकर 30 से 40 प्रतिशत तक की छूट देने का दावा किया जा रहा है।
लाखों रुपये का स्टॉल कारोबार, बिलिंग व्यवस्था पर सवाल
एग्जीबिशन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, 10×10 के एक स्टॉल के लिए दो दिनों का किराया करीब 30 से 50 हजार रुपये तक बताया जा रहा है। वहीं, पूरे हॉल का किराया भी प्रतिदिन लाखों रुपये तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
सबसे गंभीर सवाल यहां होने वाली बिक्री की बिलिंग व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। आरोप है कि कई स्टॉलों पर ग्राहकों को खरीदारी के बाद विधिवत बिल उपलब्ध नहीं करवाया जा रहा। यदि यह आरोप सही है तो जीएसटी और अन्य कर नियमों के अनुपालन की जांच जरूरी हो जाती है।
सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में
एग्जीबिशन में बड़ी संख्या में स्टॉल लगाए जाने के कारण हॉल के भीतर आवाजाही के लिए उपलब्ध स्थान भी सीमित नजर आने की बात कही जा रही है। ऐसे में किसी आपात स्थिति में लोगों के सुरक्षित बाहर निकलने के रास्तों और इमरजेंसी एग्जिट की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
यदि किसी कारण से आग, भगदड़ या अन्य आपात स्थिति पैदा होती है तो पर्याप्त निकासी मार्ग उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। ऐसे में संबंधित सुरक्षा मानकों की जांच प्रशासन और फायर विभाग द्वारा किया जाना आवश्यक है।
विभागों की भूमिका पर भी उठे सवाल
एक ही स्थान पर बड़े पैमाने पर कारोबार होने के बावजूद यदि बिक्री का उचित रिकॉर्ड और बिलिंग नहीं हो रही है, तो जीएसटी विभाग, आयकर विभाग तथा संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि, बिना आधिकारिक जांच के टैक्स चोरी की राशि या किसी व्यापारी की ओर से नियमों के उल्लंघन को तथ्य के रूप में कहना उचित नहीं होगा। जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर स्टॉल संचालकों की बिलिंग, जीएसटी पंजीकरण, खरीद-बिक्री के दस्तावेज और सुरक्षा इंतजामों की जांच करें।
अब देखना यह होगा कि लाखों रुपये के कारोबार वाली इस एग्जीबिशन को लेकर संबंधित विभाग निरीक्षण और जांच करते हैं या फिर मामला केवल शिकायतों और आरोपों तक ही सीमित रहता है।