पंजाब में सफाई कर्मचारियों ने वापस ली हड़ताल, सरकार एक महीने में लंबित मांगों पर बनाएगी कमेटी: हरपाल सिंह चीमा
चंडीगढ़, 21 मई: पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब सरकार के साथ सकारात्मक बातचीत के बाद विभिन्न नगर परिषदों, नगर समितियों, नगर निगमों और नगर पंचायतों के सफाई कर्मचारियों ने अपनी चल रही हड़ताल वापस लेने का फैसला किया है।
गुरुवार को सफाई कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि कर्मचारियों की 35 सदस्यीय कमेटी के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने कैबिनेट मंत्री हरजोत बैंस, वरिष्ठ अधिकारियों और सरकार के प्रतिनिधियों के साथ विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान कर्मचारियों की कई मांगों का समाधान कर लिया गया है, जबकि कुछ मुद्दे कानूनी प्रक्रिया और चुनाव आचार संहिता से जुड़े होने के कारण आगे विचार-विमर्श के लिए रखे गए हैं। सरकार और यूनियनों के बीच सहमति बनी है कि लंबित मांगों के समाधान के लिए एक कमेटी गठित की जाएगी, जो एक महीने के भीतर स्थायी और व्यावहारिक समाधान पर काम करेगी।
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि सरकार ने कर्मचारियों की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए बाकी मुद्दों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का भरोसा दिया है। इसी भरोसे के बाद यूनियनों ने हड़ताल समाप्त करने पर सहमति जताई।
मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू द्वारा मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर दिए गए बयान की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को “आईएसआई एजेंट” कहना केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पंजाब के लोगों और उनके जनादेश का भी अपमान है।
उन्होंने भाजपा पर पंजाब विरोधी सोच रखने का आरोप लगाते हुए कहा कि पहले उठे कुछ राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भाजपा नेताओं ने सवाल नहीं उठाए, लेकिन अब राजनीतिक लाभ के लिए आरोप लगाए जा रहे हैं।
लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े एक अन्य सवाल पर हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि देश का संविधान हर नागरिक को अपने विचार रखने और राजनीतिक प्रक्रिया में भाग लेने का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि युवाओं, विद्यार्थियों और सामाजिक समूहों की आवाज को दबाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
उन्होंने आरोप लगाया कि देश में असहमति की आवाजों को सीमित करने की कोशिशें की जा रही हैं और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति की रक्षा की जानी चाहिए।