पंजाब में गहराया बिजली संकट: रिकॉर्ड मांग, कम उत्पादन और लंबे कटों से उद्योग प्रभावित
चंडीगढ़/जालंधर: पंजाब में उमस भरी गर्मी के बीच बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि कई बिजली उत्पादन इकाइयों के बंद रहने से राज्य गंभीर बिजली संकट का सामना कर रहा है। शुक्रवार को प्रदेश में बिजली की मांग बढ़कर 16,619 मेगावाट तक पहुंच गई, जो हाल के दिनों का उच्च स्तर माना जा रहा है। इसके मुकाबले शाम 5 बजे तक राज्य का अपना बिजली उत्पादन केवल 4,472 मेगावाट रहा। मांग और उत्पादन के बीच बड़े अंतर को पूरा करने के लिए पंजाब को नॉर्दर्न ग्रिड से बड़ी मात्रा में बिजली खरीदनी पड़ रही है।
सूत्रों के अनुसार, राज्य के प्रमुख निजी थर्मल प्लांटों में कोयले का सीमित भंडार भी चिंता का विषय बना हुआ है। राजपुरा थर्मल प्लांट में लगभग तीन दिन तथा तलवंडी साबो थर्मल प्लांट में करीब सात दिन का कोयला स्टॉक शेष बताया जा रहा है। राजपुरा की 700-700 मेगावाट क्षमता वाली दो इकाइयों में से एक तकनीकी खराबी के कारण बंद है, जबकि दूसरी पहले से ही उत्पादन नहीं कर रही है। इसके अलावा कुछ अन्य थर्मल और हाइड्रो यूनिट्स भी उपलब्ध नहीं हैं, जिससे बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।
उद्योग, खेती और ग्रामीण क्षेत्रों पर असर
बिजली की कमी का असर उद्योगों, किसानों और आम उपभोक्ताओं पर साफ दिखाई देने लगा है। कई क्षेत्रों में लंबे समय तक बिजली कट लगाए जा रहे हैं, जिससे सिंचाई, घरेलू कार्यों और छोटे कारोबारों की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
जालंधर में उद्योगपतियों का विरोध प्रदर्शन
बिजली कटौती से नाराज जालंधर के उद्योगपतियों और फैक्ट्री संचालकों ने शुक्रवार देर रात सोडल चौक में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे के बीच कई क्षेत्रों में 10 से 11 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। उनका कहना था कि लगातार कटों के कारण न केवल फैक्ट्रियों का उत्पादन प्रभावित हो रहा है, बल्कि घरों में पानी की सप्लाई और अन्य जरूरी सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार, जालंधर की लगभग 3,000 औद्योगिक इकाइयां इस संकट से प्रभावित हैं। लंबे बिजली कट के चलते कई फैक्ट्रियों को निर्धारित समय से पहले उत्पादन बंद करना पड़ रहा है, जिससे उत्पादन क्षमता घट रही है। वहीं मजदूरी, मशीनरी रखरखाव और अन्य संचालन खर्च यथावत बने हुए हैं, जिससे उद्योगों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
समाधान की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती मांग, सीमित उत्पादन क्षमता और ईंधन उपलब्धता की समस्याओं के चलते आने वाले दिनों में बिजली प्रबंधन सरकार और पावरकॉम के लिए बड़ी चुनौती बना रह सकता है। यदि बंद पड़ी उत्पादन इकाइयों को जल्द चालू नहीं किया गया और कोयले की आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ, तो उद्योगों और उपभोक्ताओं को और अधिक बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है।